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AMU : क्रिप्टो करेंसी के अपने फायदे और नुकसान, वाद विवाद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन ..

छात्र अगर अपना टाइम टेबल तैयार कर लें और सख़्ती से इस पर डटे रहें तो कामयाबी हमेशा आपके कदम चूमेगी।
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अलीगढ़

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Dhirendra yadav

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Updated: 21 Apr 2018, 7:33 AM IST

amu

अलीगढ़।अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी के नदीम तरीन हाल में फरोजां 2018 अदबी और कल्चरल फेस्टिवल का आयोजन हाल के लिटरेरी-ओ-कल्चरल कलब के द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र के आयोजन के साथ मोटिवेशनल लेक्चर और वाद विवाद का भी आयोजन किया गया। बतौर मुख्य अतिथि समारोह को संबोधित करते हुए एएमयू के डायरेक्टर स्कूल एजूकेशन और ओएसडी वाइस चांसलर प्रो. अस्फर अली खान ने कहा छात्र शिक्षा के साथ अदबी और कल्चरल मुकाबलों में भी शामिल हों, इससे उनके व्यकक्तित्व
के विकास मे मदद मिलती है।

इस तरह मिलती है कामयाबी
प्रिंसिपल जाकिर हुसैन इंजीनीयरिंग कॉलेज प्रो. एमएम सुफियान बेग ने लेक्चार के दौरान कहा कि छात्र अगर अपना टाइम टेबल तैयार कर लें और सख़्ती से इस पर डटे रहें तो कामयाबी हमेशा आपके कदम चूमेगी। वक्त पर काम पूरा कर लेने के हुनर भविष्य में कामयाबी की जमानत होता है। इन्होंने छात्रों को अपने करियर की पिलाइंग करने का मशवरा देते हुए कहा कि बॉडी क्लाक पर तवज्जो और टाइम मेनेजमेंट कामयाबी की कुंजी है। इस मौका पर छात्रों के लिए एक वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया जिसमें उर्दू, हिन्दी और अंग्रेजी भाषाओं में छात्रों ने इस सदन का मत है कि भारत में किरपटो करंसी को वैध किया जाये के विषय के विरोध और पक्ष में जोरदार दलीलें पेश कीं । बतौर जज इस मुकाबले के विजेताओं के नामों का ऐलान करते हुए प्रसिद्ध कहानी-कार,उर्दू विद्वान और प्रवक्ता वीमनस कॉलेज डाक्टर फुरकान संभली ने कहा कि दुनियाभर में एक हजार से अधिक किरपटो करंसीयां चलन में हैं, जिनमें से बिटकॉइन सबसे ज्यादा प्रचलित मुद्रा है। क्रिप्टो करेंसी पर चूंकि हुकूमत की निगरानी मुम्किन नहीं है और इस में दुनिया के किसी कोने में भी रक़म का ट्रांसफर सीधे किया जाता है, इस वजह से उसे लीगल करंसी का दर्जा देने में हुकूमतों की दिलचस्पी नहीं है।

लगेगा समय
इन्होंने कहा कि क्रिप्टो करेंसी के अपने फायदे और नुकसान हैं। हिन्दुस्तान में इस करेंसी को अवाम के बीच प्रसिद्धि हासिल करने में अभी समय लगेगा। इन्होंने कहा हरचंद कि ये बहुत सुरक्षित सिस्टम है, लेकिन इस में ट्रांजेक्शन के गलत इस्तिमाल के ख़तरों से इनकार नहीं किया जा सकता है। इस में रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए भी अत्यधिक रक़म खर्च करनी होती है। फिलहाल सरकार ने इस करेंसी को लीगल का दर्जा देने से इनकार कर दिया है। विजेताओं में फैजान बुखारी(उर्दू), निशांत भारद्धाज (हिन्दी), मुजम्मिल खलीक और मुशब्बिर सिद्दीकी (अंग्रेजी) के नाम शामिल हैं। इस मौका पर अपने भाषण में लिटरेरी वार्डन डाक्टर मंसूर आलम सिद्दीकी , दीगर जज में डाक्टर फैज अहमद और डॉक्टर सरवर साजिद भी शामिल थे।