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ज्ञानवापी मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर ASI से 18 जनवरी तक मांगा जवाब

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर में कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर ASI से जवाब मांगा है। हिन्दू पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर वाराणसी कोर्ट के कार्बन डेटिंग की मांग को खारिज करने वाले आदेश को चुनौती दी है।
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प्रयागराज

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Harsh Pandey

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Updated: 1 Dec 2022, 1:38 AM IST

Allahabad HC Gyanvapi Shivling

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को ज्ञानवापी परिसर में कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग पर सुनवाई की। हाई कोर्ट ने ASI यानी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को कार्बन डेटिंग पर जवाब देने के लिए 18 जनवरी, 2023 तक का समय दिया है।

हाईकोर्ट ने पूछा है कि क्या ज्ञानवापी परिसर के अंदर पाए गए कथित शिवलिंग की कार्बन डेटिंग इसे नुकसान पहुंचा सकती है या इसकी उम्र का सुरक्षित मूल्यांकन कर सकती है।

हिन्दू पक्ष ने दायर की रिवीजन याचिका
लक्ष्मी देवी और तीन अन्य याचिकाकर्ताओं ने वर्तमान सिविल रिवीजन याचिका दायर की है। इस याचिका में 16 मई को वाराणसी की अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। दरअसल वाराणसी कोर्ट ने ज्ञानवापी परिसर में सर्वे के दौरान पाए गए कथित शिवलिंग के कार्बन डेटिंग और वैज्ञानिक निर्धारण की मांग को खारिज कर दिया था।

बुधवार को एएसआई के वकील मनोज कुमार सिंह ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा। न्यायमूर्ति जे जे मुनीर ने उनके अनुरोध को स्वीकार कर लिया।

ज्ञानवापी मामला: पिछली सुनवाई में ये हुआ था हाईकोर्ट में
इससे पहले 21 नवंबर को एएसआई के वकील ने हाईकोर्ट में कहा था कि एएसआई अभी भी अपने विशेषज्ञों के साथ चर्चा कर रहा है कि कथित शिवलिंग की आयु निर्धारित करने के लिए कौन से तरीके अपनाए जा सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने एएसआई डीजी की राय प्रस्तुत करने के लिए तीन महीने का और समय मांगा था।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4 नवंबर को इस मामले में एएसआई से जवाब मांगा था और एएसआई डीजी को एक एक्सपर्ट राय प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था कि क्या कार्बन-डेटिंग, ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार यानी जीपीआर, खुदाई और अन्य तरीकों के माध्यम से उस संरचना की जांच की जाए।

हाईकोर्ट ने ये भी पूछा था कि क्या इन तरीकों से कथित शिवलिंग की आयु, प्रकृति और अन्य जरूरी जानकारी को निर्धारित करने की संभावना थी। इसके अलावा उच्च न्यायालय ने अपने 4 नवंबर के आदेश में एआईएम, राज्य सरकार, जिला प्रशासन और मामले में अन्य पक्षों को भी नोटिस जारी किया था।

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