
क्या विधानसभा में बढ़ेगा अलवर का कद
प्रदेश में नई सरकार के मंत्रिमंडल में अलवर के ओहदे पर सबकी निगाहें हैं, लेकिन विधानसभा में भी अलवर जिले का दबदबा बढ़ सकता है। कारण है कि इस बार जिले से भाजपा व कांग्रेस के कई अनुभवी विधायक चुनकर पहुंचे हैं। ये वरिष्ठ विधायक विधानसभा फ्लोर मैनेजमेंट की अगुवाई करते दिखाई पड़ सकते हैं।
विधानसभा चुनाव में अलवर जिले की 11 सीटों में से 6 पर कांग्रेस एवं पांच पर भाजपा का कब्जा है। इस बार कांग्रेस के चार विधायक दो या इससे ज्यादा बार जीत दर्ज करा चुके हैँ। कांग्रेस के दो विधायक ही पहली बार चुने गए हैं। वहीं भाजपा के तीन विधायक दो या इससे ज्यादा बार चुने जा चुके हैं, वहीं एक विधायक को संसद की कार्रवाई का अनुभव है। वहीं एक नए विधायक भी इस बार विधानसभा पहुंचे हैं।
दोनों ही दलों को अनुभवी विधायकों की जरूरत
इस बार विधानसभा का नजारा पहले की बजाय कुछ बदला सा है। नई सरकार में नए मुख्यमंत्री सहित कई नए चेहरे भी दिखाई देंगे, वहीं सदैव विधानसभा की सुर्खियों में रहने वाले भाजपा व कांग्रेस के कई अनुभवी चेहरे इस बार विधानसभा में नहीं होंगे। यही कारण है कि इस बार दोनों ही दलों को अनुभवी विधायकों की फ्लोर मैनेजमेंट के लिए जरूरत पड़ रही है। अलवर जिला भी इस जरुरत की पूर्ति में सहायक हो सकता है।
कांग्रेस व भाजपा तीन- तीन विधायकों की भूमिका हो सकती विशेष
इस बार विधानसभा में कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक जुबेर खां, पूर्व मंत्री टीकाराम जूली के अलावा कांति मीणा एवं दीपचंद खैरिया को विधानसभा में पार्टी की ओर से विशेष भूमिका दी जा सकती है। इसी प्रकार भाजपा की ओर से पूर्व मंत्री डॉ. जसवंत यादव, वरिष्ठ विधायक रमेश खींची व संजय शर्मा को भाजपा की ओर से विधानसभा में विशेष भूमिका सौंपी जा सकती है। वहीं पूर्व में सांसद रहे महंत बालकनाथ योगी को भी भाजपा की ओर से विधानसभा में खास भूमिका में रखा जा सकता है।
भाजपा के कुछ विधायक बन सकते हैं मंत्री
अलवर जिले के पांच विधायकों में कुछ को मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है। ऐसे में अन्य वरिष्ठ विधायकों को विधानसभा फ्लोर मैनेजमेंट की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
Published on:
18 Dec 2023 10:39 pm
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