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भाजपा व कांग्रेस को अलवर में किस बात की चिंता

विधानसभा चुनाव में अलवर जिले की 11 सीटों पर त्रिकोणीय व चतुष्कोणीय मुकाबले की संभावना है। यही कांग्रेस व भाजपा की असली चिंता है। इस बार विधानसभा चुनाव में चुनावी परिदृश्य अलग रह सकता है। इसमें प्रमुख राजनीतिक दलों को झेलनी पड़ सकती है बगावत की मार।
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अलवर

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Prem Pathak

•

Updated: 20 Oct 2023, 11:39 PM IST

भाजपा व कांग्रेस को अलवर में किस बात की चिंता

भाजपा व कांग्रेस को अलवर में किस बात की चिंता

विधानसभा चुनाव के लिए भले ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने अभी अपने पूरे पत्ते नहीं खोले हो, लेकिन इस बार चुनावी घमासान पिछले सालों की तुलना में अलग रहने के आसार हैं। इस बार ज्यादातर सीटें त्रिकोणीय एवं चतुष्कोणीय मुकाबले में फंसने की संभावना है। भाजपा की ओर से तीन सीटों पर प्रत्याशियों की घोषणा के बाद कुछ ऐसी ही चुनावी तस्वीर उभरने भी लगी है।
कांग्रेस व भाजपा की प्रत्याशियों की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है, लेकिन चुनावी घमासान के आसार नजर आने लगे हैं। कारण है कि इस बार प्रमुख दलों में टिकट को लेकर मारामारी ज्यादा है। इसमें भी भाजपा में टिकट को लेकर दावेदारों के बीच घमासान है और यही भाजपा की परेशानी है। तीन- चार सीटें कांग्रेस के लिए भी मुसीबत का कारण बनी है।

इस बार बगावत के आसार ज्यादा

चुनाव में टिकट वितरण के दौरान वैसे तो हर बार ही प्रमुख राजनीतिक दलों को बगावत का सामना करना पड़ता है। लेकिन इस बार यह समस्या शुरुआती दौर से ही दिखाई पड़ रही है। प्रमुख दलों में भाजपा ने ही अभी तीन सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं, लेकिन इनमें से दो सीटों पर बगावत के सुर तेज हो गए हैं। इनमें दो सीटों पर अभी से त्रिकोणीय मुकाबले का परिदृश्य बनने लगा है। यह िस्थति तो तब है जब कांग्रेस ने अभी प्रत्याशी घोषणा की शुरुआत ही नहीं की है। कांग्रेस की सूचियां आने के बाद यह घमासान और भी बढ़ सकता है।

सभी सीटों पर टिकट को लेकर मारामारी

अलवर जिले की 11 सीटों पर भाजपा एवं कांग्रेस टिकट को लेकर मारामारी है। भाजपा में एक- एक सीट पर दो से तीन मजबूत दावेदार मैदान में हैं। वहीं पार्टी की ओर से बड़े नेताओं या सांसदों को लड़ाने का प्रयोग भी ऐसे दावेदारों के अरमानों पर पानी फेरता दिखाई पड़ रहा है। वहीं कांग्रेस में तीन- चार सीटों को छोड़कर अन्य पर दो से तीन मजबूत दावेदार हैं। इस कारण टिकट वितरण के बाद प्रमुख दलों को बगावत का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ज्यादातर सीटों पर त्रिकोणीय या चतुष्कोणीय मुकाबले की संभावना अभी से बनने लगी है।