उन्होंने अपने विमोचन संदेश में कहा कि "गाँधी की शक्ति उनकी मौलिक सोच व गहन अंतर्दृष्टि में निहित थी, जो किसी भी नए युग-बोध के लिए, अपने आप में बहुत बड़ी ताक़त है, इसीलिए उनके विचार आज भी प्रासंगिक, ज़िन्दा व सार्थक स्वरूप में अपनी सार्वभौमिक उपस्थिति दर्ज़ करा रहे हैं, अतः गाँधी संदर्भित लेखन सदैव मानवता के कल्याण का पक्षधर रहेगा। इस पुस्तक के लिए राजस्थान व गुजरात राज्य के 28 शिक्षकीय विद्वानों ने अध्याय लिखे हैं। इस अवसर पर राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी के निदेशक डाॅ बी एल सैनी, गाँधीवादी विचारक फारूक़ अफरीदी, डाॅ. प्रेम सिंह मीणा व दयानंद मीणा उपस्थित रहे।