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कोरोना ने खोली होम स्कूलिंग की राह

कोरोना काल में सभी स्कूल और कॉलेज बंद हो गए हैं। सभी बच्चों की ऑन लाइन पढ़ाई हो रही है। अलवर जिले में एक लाख से अधिक बच्चों ने तो किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। जब ऑन लाइन पढ़ाई ही बिना स्कूल जाए हो रही है तो एेसे में बहुत से अभिभावकों ने एेसे एप डाउन लोड किए हैं जिनकी सहायता से बच्चे आसानी से पढ़ सकते हैं।
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अलवर

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Dharmendra Adlakha

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Updated: 30 Nov 2020, 9:17 AM IST

कोरोना ने खोली होम स्कूलिंग की राह

कोरोना ने खोली होम स्कूलिंग की राह

कोरोना काल में सभी स्कूल और कॉलेज बंद हो गए हैं। सभी बच्चों की ऑन लाइन पढ़ाई हो रही है। अलवर जिले में एक लाख से अधिक बच्चों ने तो किसी भी स्कूल में प्रवेश नहीं लिया है। जब ऑन लाइन पढ़ाई ही बिना स्कूल जाए हो रही है तो एेसे में बहुत से अभिभावकों ने एेसे एप डाउन लोड किए हैं जिनकी सहायता से बच्चे आसानी से पढ़ सकते हैं। इसके चलते भविष्य में छोटे बच्चों के लिए स्कूलिंग अधिक जरूरी नहीं रह जाएंगे जबकि स्कूलों में अभी तक कक्षा आठवीं तक विद्यार्थियों को फेल ही नहीं किया जाता है।

अलवर जिले में कई जागरूक अभिभावक एज्युकेशन एप डाउन लोड करके उनकी फीस देकर उसी पर बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ये वो एप हैं जिन्हें परिष्कृत रूप दिया है। इन एप पर बच्चे को होम वर्क दिया जाता है और उसे प्रतिदिन चेक किया जाता है। कई एप में तो अमेरिका की बेहतर शिक्षा पद्धति के अनुसार पढ़ाई करवाई जा रही है। इन एप के प्रति रुझान निरन्तर बढ़ता जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में आ सकता है परिवर्तन-

शिक्षाविदों का कहना है कि हर क्षेत्र में परिवर्तन आ रहा है तो एेसे में शिक्षा का क्षेत्र कैसे अछूता रह सकता है। इस समय बच्चों का स्कूल जाना संभव नहीं है और छोटी कक्षाओं के लिए स्कूल जाने की अनिवार्यता समाप्त हो सकती है। उसे कक्षा के हिसाब से ज्ञान होना चाहिए जिससे उसे अगली कक्षा में प्रवेश दिया जा सके। बड़ी कक्षाओं में तो बच्चे पहले ही बिना शिक्षण संस्थाए ही टॉपिक के आधार पर ऑन लाइन पढ़ते हैं। कई शहरों में तो यह पहले ही हो गया है कि एक सप्ताह में मात्र एक या दो दिन ही स्कूल जाना होगा। इसके लिए स्कूल उसी हिसाब से पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है।

यह तो करना ही पडेग़ा-घर पर बैठकर बच्चों का पढऩा समय की मांग है। हो सकता है कि छोटे बच्चों के स्कूल जाने का कंसेप्ट ही समाप्त हो जाए। इस समय बच्चे स्कूलों से अधिक तो घर में बैठकर पढ़ सकते हैं। इसमें अभिभावकों का जागरुक होना आवश्यक है। हमारे यहां शिक्षा का स्तर उस स्तर का नहीं है लेकिन यह हो सकता है।

-मनीष जैन, युवा शिक्षाविद्।

घर में पढ़ा सकते हैं-हम बच्चों को स्कूल से अधिक घर में ही पढ़ा सकते हैं। इसके लिए घर में माहौल बनाना होगा। यह छोटी कक्षाओं के लिए सही है, इसके लिए बहुत से एप बाजार में अभी आए हैं जिनसे पढऩे का क्रेज बढ़ता जा रहा है।

-अंजली मेहंदीरत्ता, अभिभावक।