काशीराम चौराहा पर गजक बेचने वाले महेंद्र कुमार ने बताया कि नवंबर माह शुरू होने के साथ ही
तिल से बने गजक, रेवड़ी, तिल के लड्डू, तिल की बर्फी आदि बनाने का काम शुरू हो जाता है। सर्दी बढऩे के साथ साथ ही तेल की मांग भी बढ़ती जाती है। उन्होंने बताया कि शुरुआत में तिल से बने आइटम डेढ़ सौ से ढाई सौ रुपए किलो बिकते हैं, मांग बढऩे के साथ भी दाम में भी अंतर आ जाता है।