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अपनों के साथ तो सभी मनाते हंै खुशियां हम उदास दिलों में भी उजाले भर देते हैं

सहयोग संस्थान 1100 बच्चों का जन्म दिन मना चुका
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अलवर

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Pradeep kumar yadav

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Updated: 22 Aug 2022, 1:38 AM IST

अपनों के साथ तो सभी मनाते हंै खुशियां हम उदास दिलों में भी उजाले भर देते हैं

अपनों के साथ तो सभी मनाते हंै खुशियां हम उदास दिलों में भी उजाले भर देते हैं

अलवर. अपने बच्चों का जन्मदिन तो सभी मनाते हैं, लेकिन उन बच्चों का जन्मदिन भी मनाया जाना चाहिए जिनका अपना कोई नहीं है, माता पिता नहीं है। इसी सोच के साथ अलवर की सामाजिक कार्य से जुडी संस्था सहयोग सेवा संस्थान पिछले दस सालों से लगातार दुर्बल एवं अभावग्रस्त बालकों का सामूहिक जन्मोत्सव मना रहे हैं। साल भर बच्चे इस दिन का इंतजार करते हैं।
प्रतिवर्ष मनाते 100 से ज्यादा बच्चों का सामूहिक जन्मदिन
संस्थान से जुडे अमित खंडेलवाल ने बताया कि अभी तक करीब 1100 बच्चों का जन्मदिन मना चुके हैं। प्रतिवर्ष कृष्ण जन्माष्टमी के बाद यह आयोजन किया जाता है। इसमें लगभग 100 से ज्यादा अभावग्रस्त बालकों का सामूहिक जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस बार भी रविवार को मंगल विहार,अलवर में जन्मदिन मनाया गया। इसमें आरती बालिका गृह और अपना घर आश्रम के बच्चे शामिल हुए। बच्चों को खेलकूद प्रतियोगिता कराई गई। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी, केक काटा। बच्चों को उपहार स्वरूप क्रिकेट किट, बैडङ्क्षमटन किट, फुटबॉल, लूडो व अन्य सामान के साथ स्टेशनरी भी दी गई। इसके साथ ही बालिकाओं को सैनेटरी नेपकीन की किट प्रदान की गई।
कार्यक्रम में संस्थान अध्यक्ष पूजा गुप्ता, अमित कुमार, धर्मवीर यादव, बब्बू यादव, शकुन गुप्ता, प्रमिला गुप्ता, प्रेम यादव, वंदना महावर सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।


ये जन्मदिन क्या होता है, कैसे मनाते हैं- यह बात दिल को छू गई
संस्थान से जुडी दीप्ती खंडेलवाल ने बताया कि करीब दस साल पहले बच्चे का जन्मदिन मनाने एक बालगृह में गए तो वहां रह रहे बच्चों ने पूछा कि ये जन्मदिन क्या होता है। क्यूं मनाते हैं, हमें भी मनाना है। बच्चों की कही यह बात दिल में घर कर गई। तब सोचा कि इनके माता पिता नहीं है तो इनको जन्मदिन भी याद नहीं है। इसलिए इनका सामूहिक जन्मदिन मनाया जाना चाहिए। तभी से इसकी शुरुआत की। जन्म दिन मनाने से बच्चे खुश हुए।