आषाढ मास शुक्ल पक्ष की अष्टमी को जगन्नाथ मंदिर में जगन्नाथ का भात, जगत पसारे हाथ कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। लेकिन इस बार कोरोना प्रोटाकाल के तहत यह आयोजन भी प्रतिकात्मक रूप से ही हुआ। दोपहर 12 बजे 72 घंटे बाद भगवान जगन्नाथ के पट खोले गए और महाआरती हुई। इसके बाद भक्तों ने भगवान के दर्शन किए। प्रतिवर्ष भगवान की आरती के बाद पंचामृत व चावल का भोग लगाकर भक्तों को प्रसाद दिया जाता है। मंदिर से जुडे बहुत से श्रद्धालु साल भर इस प्रसाद का इंतजार करते हैं, इसको लेने के बाद ही भोजन करते हैं। लेकिन इस बार कोरोना के चलते प्रसाद का वितरण नहीं हुआ।