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मोहनलाल सुखाडिय़ा की सरकार बनाने में अलवर के इस नेता का था अहम योगदान, जवाहर लाल नेहरु के रहे थे करीबी

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अलवर

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Hiren Joshi

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Updated: 24 Oct 2018, 12:02 PM IST

Jaikisan Sharma Of Alwar Played a Vital Role In Sukhadia Government

मोहनलाल सुखाडिय़ा की सरकार बनाने में अलवर के इस नेता का था अहम योगदान, जवाहर लाल नेहरु के रहे थे करीबी

नौगांवा. रामगढ की राजनीति का यूं तो सदैव ही राज्य सहित देश की राजनीति में वर्चस्व रहा है, जहां रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र ने प्रदेश को वर्ष 1951 में पहला सिख विधायक दुर्लभ सिंह दिया, वहीं 1977 के दशक तक गंगा देवी डाटा को 1957 और उमा माथुर को 1962 में जिताकर विधानसभा भेजा। यहीं नहीं सत्तर और अस्सी के दशक में जिले राजनीति रामगढ़ के दो दिग्गजों के इर्द-गिर्द घूमती रही। पं. जयकिशन शर्मा मूलत: नारायणपुर गांव के रहने वाले थे और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रहने के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू से भी नजदीकी रही।

पं. जयकृष्ण शर्मा की राजनीति में पकड़ का अंदाजा इस बात से ही सहज लगाया जा सकता है, आपातकाल के बाद वर्ष 1977 के चुनाव में जब देश व प्रदेश में जनता पार्टी की प्रचण्ड लहर थी, उस दौर में भी शर्मा ने रामगढ सीट पर कांग्रेस की जीत दर्ज कराई। वर्ष 1977 में शर्मा ने जनता पार्टी के प्रत्याशी हरिशंकर गोयल को हराया।

रामगढ़ से शुरू किया शर्मा ने राजनीतिक सफर

पं. जयकिशन शर्मा ने वर्ष 1960 में रामगढ से अपना राजनीतिक सफर रामगढ पंचायत समिति के प्रधान निर्वाचित होने के साथ प्रारंभ किया। बाद में वे थानागाजी से कांग्रेस के टिकट पर 1962 में विधायक निर्वाचित होकर सुखाडिया मंत्रिमण्डल में थानागाजी से पहले मंत्री बने। हालांकि वर्ष 1972 में स्वतंत्र पार्टी के लक्ष्मीनारायण ने उन्हें पराजित कर दिया। हार के बाद भी तत्कालीन तिजारा विधायक बरकतुल्ला खां ने उन्हे राजस्थान लघु उद्योग निगम का चेयरमैन बनाकर राज्य मंत्री का दर्जा दिया। बाद में 1980 में भी शर्मा रामगढ़ से कांग्रेस से विजयी रहे। वर्ष 1982 में वे जिला प्रमुख बने और बाद में राज्य सरकार में यातायात मंत्री बने। शर्मा दो बार जिला प्रमुख और कांग्रेस जिलाध्यक्ष भी रहे।

टिकट कटा तो बेटे को दिलवा दिया

वर्ष 1985 में जिले के दो दिग्गज जयकिशन शर्मा और घासीराम के टिकट कट गए, लेकिन जयकिशन अपने पुत्र राजेश शर्मा को थानागाजी से कांग्रेस टिकट दिलवाने में कामयाब रहे। चुनाव में राजेश शर्मा विजयी रहे और हरिदेव जोशी मंत्रिमण्डल में संसदीय सचिव बने।

सुखाडिया को मुख्यमंत्री बनवाने में निभाई भूमिका

वर्ष 1967 में कांग्रेस की सरकार बनाने में शर्मा ने अहम रोल अदा किया। उन्होंने राजगढ़ से स्वतंत्र पार्टी से जीते समर्थलाल मीणा का सुखाडिया को समर्थन दिलाकर सरकार बनवाई। शर्मा की भाषण कला भी लोगों को आकर्षित करती थी।