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अधिकतर बीएड कॉलेज हो जाएंगे बंद

नई शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव आगामी वर्षों में शिक्षा के सभी स्तरों पर देखने को मिलेगा। अब सामान्य स्नातक की डिग्री के साथ ही विद्यार्थी बीएड कर सकेंगे। इसी प्रकार वहीं बीएड कॉलेज चल सकेंगे जो सरकार यानि एनसीटी के अनुसार निर्धारित मापदंडों का पूरा करेंगे।
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अलवर

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Dharmendra Adlakha

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Updated: 12 Aug 2020, 9:57 AM IST

नई शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव आगामी वर्षों में शिक्षा के सभी स्तरों पर देखने को मिलेगा। अब सामान्य स्नातक की डिग्री के साथ ही विद्यार्थी बीएड कर सकेंगे। इसी प्रकार वहीं बीएड कॉलेज चल सकेंगे जो सरकार यानि एनसीटी के अनुसार निर्धारित मापदंडों का पूरा करेंगे।

नई शिक्षा नीति के तहत हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बनाया जाएगा जिसके तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थान आएंगी। इसी कमीशन के अधीनस्थ बीएड कॉलेज और सामान्य डिग्री कॉलेज संचालित होगे। 2 वर्षीय बीएड की डिग्री 2030 के बाद मान्य नहीं रहेगी। इसके चलते युवाओं का रुझान भी 2 वर्ष डिग्री की तरफ नहीं रहेगा । वर्तमान में भारत सरकार इन बीएड कॉलेज को बंद नहीं कर रही है। सरकार उन्हीं बीएड कॉलेजों को बंद करने की कोशिश है जिनमें एनसीटी के नियमानुसार के अनुसार सुविधाएं नहीं है। इनमें योग्य अध्यापक, भौतिक सुविधाएं और अध्यापकों को निर्धारित वेतन नहीं दिया जा रहा ।
नई शिक्षा नीति के तहत बीएड की पढ़ाई अब सामान्य डिग्री कॉलेज में साथ-साथ विषयों को विद्यार्थी पढ़ते हुए पूरी करेंगे । नई शिक्षा नीति के अनुसार अब भारत में एकल बीएड कॉलेज कहीं भी संचालित नहीं होंगे। बीएड कॉलेज केवल सामान्य डिग्री कॉलेजों के साथ ही संचालित होंगे। इसमें विद्यार्थी को बीएड के विषयों के साथ-साथ दूसरे सामान्य विषयों की शिक्षा प्राप्त करने का भी मौका प्राप्त होगा। इससे प्रदेश के बीएड कॉलेजों पर अस्तित्व का संकट बरकरार है।

प्रदेश में यह है स्थिति-
वर्तमान में राजस्थान में कुल 913 बीएए कॉलेज है। इसी प्रकार 390 बीए/बीएससी इंटीग्रेटेड बीएड कॉलेज है। अलवर जिले मेंमें 66 बीएड और 17 इंटीग्रेटेड बीएड कॉलेज है। राजस्थान के 5 सरकारी बीएड कॉलेजों की मान्यता सत्र 2020-21 में निरस्त कर दी है। अलवर जिले के बीएड कॉलेज या इंटीग्रेटेड बीएड कॉलेज में एन. सी. टी. ई. की योग्यता के अनुसार नैट या पीएचडी क्वालीफाइड स्टॉफ होने की शिकायत पहले से ही की जाती रही हैं। अब इन कॉलेजों पर आगामी वर्षों में सख्ती कर इनकी मान्यता निरस्त करने की कार्रवाई हो सकती है। शिक्षाविद डॉ. सतवीर यादव के अनुसार अब शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों की कार्यप्रणाली में कई सकारात्मक परिवर्तन आएंगे। नई शिक्षा नीति के अनुसार इनको अपना ढर्रा बदलना होगा।