5 नवंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

भक्तों के जयकारों के साथ मां सरयू की गोद में समाहित हुईं मां भवानी

भक्तों के जयकारों के साथ मां सरयू की गोद में समाहित हुईं मां भवानी
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

अम्बेडकर नगर

•

image

Ruchi Sharma

•

Updated: 1 Oct 2017, 5:53 PM IST

ambedkar nagar

ambedkar nagar

अम्बेडकर नगर. शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के 9 रूपों का दर्शन पूजन करने के उपरान्त आज उन्हें इस साल की अंतिम विदाई दे दी गई। जिले के टांडा नगर और तहसील क्षेत्र के दर्जनों गांवों से सुबह से मां के जयकारे लगाते हुए भक्त मां भवानी की प्रतिमा का विसर्जन करने के लिए ट्रालियों पर उनकी भव्य झांकी के साथ टांडा स्थित सरयू तट के लिए निकल पड़े। पूरा नगर और ग्रामीण क्षेत्र मां के जयकारों से गूंज उठा।


एक ही दिन दुर्गा प्रतिमा का विसर्जन और मुहर्रम के ताजिया का जुलूस पड़ जाने के कारण आपसी सौहार्द को कायम रखने के लिए दोनों समुदाय के लोग प्रशासन की पहल पर एक ही दिन अलग- अलग समय निर्धारित करते हुए दोनों आयोजन को सकुशल सम्पन्न कराने में जुटे हुए हैं।

इसी कड़ी में सुबह से ही टांडा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिमाएं सुबह से ही सड़कों पर दिखाई पड़ना शुरू हो गई थीं और देखते ही देखते सारे मार्गों पर मां की झांकियां ही झाकियां नजर आ रही हैं। दोपहर दो बजे तक इन सभी झांकियों को शहर के मुख्य्मार्गों से होते हुए नदी के तट पर पहुंचा जाना था, जिसके कर्म में सभी झांकियां पहुंच भी गईं।


विधायक के आरती व पूजन के बाद शुरू हुआ विसर्जन कार्यक्रम

भव्य विसर्जन शोभा यात्रा जब टांडा के चौक घंटा घर के पास पहुंची तो वहां पहले से प्रतीक्षा कर रही भाजपा की विधायक श्री मति संजू देवी ने मां भवानी की आरती उतार कर उन्हें विदा किया, जिसके बाद वहीं से शोभा यात्रा सरयू नदी के तट पर पहुंचना शुरू हुई और वहां पहले से ही तैनात नाविकों के दल ने ट्रालियों से मां भगवती समेत अन्य देवी देवताओं की प्रतिमा को उतार कर नाव के माध्यम से बीच धारा में ले जाकर विसर्जित करना शुरू कर दिया।

दोनों समुदाय के लोग कर रहे हैं एक दूसरे का सहयोग

पिछले तीन सालों से मुहर्रम और दुर्गा पूजा की तिथियां एक ही साथ पड़ रही हैं।
इसके पूर्व 1983 में भी ये दोनों पर्व एक साथ पड़े थे, जिसमे दोनों समुदायों के बीच विवाद होने के कारण टांडा में दंगा भड़क गया था और काफी हानि हुई थी। पिछली घटना से सीख लेते हुए इस बार दोनों समुदाय के लोग न सिर्फ आपसी सहमती से दोनों पर्व एक साथ माना रहे हैं बल्कि दोनों समुदाय के लोग एक दूसरे का सहयोग भी कर रहे हैं।

प्रशासन के लोग भी इस आयोजन में आयोजकों के भाई चारे की तारीफ़ कर रहे हैं।वास्तव में यह तालमेल दोनों समुदायों के बीच की दूरियां मिटाते हुए साम्प्रदायिक सद्भावना की मिशाल बन गया है।







बड़ी खबरें

View All

अम्बेडकर नगर

उत्तर प्रदेश