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मैनपाट में अब नहीं रही वो बात, सीएम भी चिंतित

गर्मी के मौसम में भी ठंड का अहसास कराने वाले मैनपाट का तेजी से बढ़ रहा है तापमान, मुख्यमंत्री भी जता चुके हैं चिंता, अंधाधुंध पेड़ों की कटाई व उत्खनन है मुख्य वजह
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Pranayraj rana

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Feb 29, 2016

Mainpat mountain

Mainpat mountain

अंबिकापुर.
प्रकृति के साथ छेड़छाड़ का परिणाम अब मैनपाट के मौसम पर भी पडऩे लगा है। यहां के पेड़ों की अंधाधुंध कटाई व विकास के नाम पर खनिज उत्खनन के कारण मैनपाट में अब वो बात नहीं रही है। छत्तीसगढ़ का शिमला कहे जाने वाले मैनपाट में जहां कभी गर्मी के मौसम में भी लोग ठंड का एहसास करते थे, लेकिन वनों के दोहन से तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। मैनपाट की तेजी से बदल रही आबोहवा को देखते हुए मुख्यमंत्री भी विकास प्राधिकरण की बैठक में चिंता व्यक्त कर चुके हैं।


छत्तीसगढ़ के शिमला के नाम से विख्यात मैनपाट की प्राकृतिक सुंदरता देखने लोग दूर-दराज से पहुंचते हैं। लेकिन यहां पहुंचने के बाद उन्हें अब निराशा ही हासिल हो रही है। इसका मुख्य कारण वनों की अंधाधुंध कटाई के साथ विकास के नाम पर उत्खनन को बताया जा रहा है।


मैनपाट की सुंदरता ही एक वजह है जो हर मौसम में लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है। लेकिन इस खूबसूरती पर इंसानों की ही नजर लग गई है। कभी मैनपाट गर्मी के दिनों में भी पूरे प्रदेश में सबसे ठंडे स्थल के रूप में जाना जाता था, लेकिन अब यहां आने वाले लोगों को ऐसा महसूस नहीं हो रहा है।


बदल गई है जलवायु

विंध पर्वतमाला पर स्थित मैनपाट प्राकृतिक संपदा से भरपूर है। यह सैलानियों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहा है। प्रकृति प्रेमी हर मौसम में यहां की खूबसूरती कि तारीफ करते थे। लेकिन पिछले कुछ सालों में लगातार ऐसा हो रहा है कि वे अब कहने लगे हैं कि मैनपाट में अब वो बात नहीं रह गई। इसके लिए कोई और नहीं आम इंसान और वहां के रहवासी खुद जिम्मेदार हैं।


मौसम विभाग भी अब हर वर्ष तापमान में बढ़ोतरी दर्ज कर रहा है। गर्मी के दिनों में कभी मैनपाट का तापमान 25 डिग्री तक ही रहता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में तापमान 30 से 35 डिग्री तक दर्ज किया जा रहा है।


नहीं लग पाए 1 लाख पौधे

विकास के नाम पर जिस तरह मैनपाट में पेड़ों की कटाई की गई है उसे लेकर सरगुजा विकास प्राधिकरण की दो बैठकों में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह भी चिंता व्यक्त कर चुके हैं। उन्होंने कहा था कि मैनपाट की हरियाली बचाने के लिए पहल करने की जरूरत है, नहीं तो इसकी सुंदरता नष्ट हो जाएगी। उन्होंने मैनपाट में एक लाख पौधरोपण करने के निर्देश अधिकारियों को दिए थे। लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई पहल नहीं की गई है।


पन्नों में रह जाएगी सुंदरता

विकास के नाम पर पूरे क्षेत्र से बाक्साइट उत्खनन के नाम पर पेड़ों की कटाई और घर निर्माण से लेकर चूल्हे तक के लिए जंगल का लगभग सफाया कर दिया गया है। मानव की इस प्रवृति ने प्रकृति का विनाश तो कर दिया, लेकिन इसे बचाए रखने कभी नहीं सोचा। लोगों की इस मानसिकता से मैनपाट की सुंदरता नष्ट हो रही है। जल्द ही इस दिशा में पहल नहीं की गई तो मैनपाट की सुंदरता सिर्फ पन्नों में रह जाएगी।

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रामप्रवेश विश्वकर्मा,
अंबिकापुर