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सेवा, त्याग और समर्पण की शपथ लेकर संत बने 30 युवा

परदेस में भारतीय परंपरा : अमरीका के न्यूजर्सी में अपने किस्म का पहला दीक्षा कार्यक्रम, कुछ विश्वविद्यालयों के छात्र तो कुछ बड़ी कंपनियों में कार्यरत
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नई दिल्ली

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ANUJ SHARMA

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Updated: 5 Oct 2023, 12:01 AM IST

सेवा, त्याग और समर्पण की शपथ लेकर संत बने 30 युवा

सेवा, त्याग और समर्पण की शपथ लेकर संत बने 30 युवा

न्यूयॉर्क. अमरीका में अपनी तरह के पहले कार्यक्रम में 30 युवा सेवा, त्याग और समर्पण की शपथ लेकर संत बन गए। ये सभी अमरीका, कनाडा, भारत में जन्मे और पले-बढ़े हैं। इनमें से कुछ विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा ले रहे हैं तो कुछ बड़ी कंपनियों में कार्यरत हैं।'दीक्षा दिवस'नाम का यह आयोजन न्यू जर्सी में बीएपीएस के स्वामीनारायण अक्षरधाम रॉबिन्सविल में हुआ। महंत स्वामी महाराज ने युवाओं को शपथ दिलवाई।

इन सभी युवाओं ने न्यू जर्सी में अक्षरधाम मंदिर के निर्माण में योगदान दिया था। महंत स्वामी महाराज ने ईश्वर और समाज की सेवा का विकल्प चुनने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने कहा कि सेवा के जरिए ईश्वर को पाने का आध्यात्मिक मार्ग उन्हें सफलता की ओर ले जाएगा। सभी युवा संत जीवनभर अक्षरधाम के विचारों और शिक्षा को आगे बढ़ाएंगे। महंत स्वामी महाराज ने कहा कि दीक्षा दिवस का सार सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों में निहित है, जिसे इन युवाओं ने चुना है। यह उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। समुदाय की भलाई सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कई अपने माता-पिता की इकलौती संतान

बीएपीएस के उत्तरी अमरीका मुख्यालय ने बताया कि इनमें से कई युवा अपने माता-पिता की इकलौती संतान हैं। उन्होंने और उनके परिवारों ने लोगों की भलाई के लिए अथाह त्याग किया है। अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस पर न्यूजर्सी में मूल्यों और अहिंसा का उत्सव नाम का विशेष सांस्कृतिक आयोजन भी हुआ। इसमें उत्तरी अमरीका से आए कई सदस्यों ने समानता, ईमानदारी, अहिंसा और हिंदुत्व के सिद्धांतों पर विचार रखे।

कार्यों और चारित्रिक शुद्धता से सफलता

सांस्कृतिक कार्यक्रम में सद्गुरु स्वयंप्रकाशदास स्वामी ने कहा कि महात्मा गांधी के जीवन से प्रेरणा लेकर केवल शब्दों से नहीं, बल्कि अपने कार्यों और चारित्रिक शुद्धता से सफलता अर्जित करनी चाहिए। अक्षरधाम आध्यात्मिक भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और एकता के प्रतीक के रूप में कार्य करता है। यह भारत की जीवंत परंपराओं और विरासत को विश्व कल्याण के लिए साझा करता है।