
राहुल गांधी जब पहुंचे लोगों के बीच, उनसे पूछे गए कुछ ऐसे सवाल, दिखा अनोखा नजारा
अमेठी. यूपी के अमेठी जिले के सांसद राहुल गांधी ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद भार संभाल लिया और अब उन पर जिम्मेदारियों का बोझ बढ़ गया है। ऐसे में जब जिम्मेदारी बढ़ी है तो सवाल भी ज्यादा होंगे। अमेठी में हुए ऐसे ही कुछ सवाल और यहां लोगों के बीच उनके स्वभाव से जुड़ी कुछ बातें सामने आई हैं...
जब राहुल गांधी से ग्रामीणों ने पूछा ये
बात है 24 अक्टूबर 2015 की, जब राहुल गांधी ने अपने संसदीय क्षेत्र का दौरा किया था। लखनऊ से अमेठी यात्रा पर निकले राहुल गांधी जब निगोहां गांव में रुके तो वहां उन्होंने पानी सप्लाई के बारे में जायजा लिया। इस दौरान गांव के ही रामफेर ने राहुल को रास्ते में रोक लिया और खस्ताहाल नाली की हालत के बारे में बताने लगा।
राहुल ने कहा कि ये तो स्थानीय स्तर पर गड़बड़ी है, इसे प्रधान करता है और ये समस्या उसी के स्तर की है। इस पर ग्रामीणों ने बताया कि अभी नया ग्राम प्रधान निर्वाचित हुआ है। ऐसे में वे लोग उससे क्या कह सकते हैं। तो राहुल ने कहा वेट कीजिए हो जाएगा। इसके बाद गांव वालों ने कहा था कि राहुल गांधी जितनी बात कहते हैं अगर वो अमलीजामा पहन ले तो अमेठी की किस्मत ही बदल जाए।
राहुल के छोटे सिपाही के रूप में मशहूर हुआ समोसे वाला
राहुल के अमेठी दौरे पर बात करते हुए कांग्रेस एमएलसी दीपक सिंह बताते हैं कि अमेठी लोकसभा के भेटुआ शाहगढ़ ब्लॉक पर एक चौराहा है, पनियर पवार हाउस। यहां सुल्तानपुर जिले के लोग आते-जाते रहते हैं। इस चौराहे पर समोसे और चाय काफी प्रसिद्ध हैं।
2004 के बाद जब राहुल गांधी पहली बार सांसद हुए थे तो अक्सर यहां पर रुककर समोसा और चाय लिया करते थे। उस वक्त इस चौराहे पर शंकर जायसवाल जिनकी एक मामूली दुकान थी जिसे शंकर के पिता चलाते थे, पर राहुल गांधी के पहुंचते ही शंकर खुद राहुल गांधी को चाय पिलाने समोसा खिलाने की व्यवसथा में लग जाते थे।
दूसरी मुलाकात में राहुल गांधी को शंकर की दुकान पर उनके बूढ़े बाप नहीं दिखे, तो उन्होंने उनका हाल चाल पूछ लिया। बस शंकर तब से इस चौराहे पर राहुल गांधी का छोटा सिपाही के नाम से जाना जाने लगा। शंकर आज दूसरी बार सोरांव गांव के प्रधान हैं। जिसमें राहुल गांधी का समोसा चाय और हाल चाल मात्र पूछने से ही शंकर नेता हो गए।
राहुल भैया आए और हमें मकान मिल गया
एमएलसी दीपक सिंह बताते हैं कि कमला कश्यप पूरब गांव निवासी जो एक टूटे छप्पर के मकान में रहती थीं, राहुल गांधी एक दिन उसी गांव में किसी पीड़ित का हाल लेने गए। कमला वहीं मिल गई।
कमला ने राहुल गांधी से कहा कि राहुल भैया हमारी गरीब की कुटिया में भी कदम रख दीजिए। राहुल जी पैदल ही चल दिए। कमला का घर ऐसा की राहुल बड़ी मुश्किल से अंदर जा सके। घास- फूस की छत, दीवारों से गिरती मिट्टी। खैर कमला ने बड़े प्यार से गुड़ और पानी पिलाया। आज कमला का पक्का मकान है और कमला कश्यप कहती हैं कि मैं कलयुग की सबरी हूं। हमारे घर राहुल भैया आए और मुझे छत मिल गई।
Published on:
19 Dec 2017 10:36 am
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