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हार के बाद पहली बार अमेठी आएंगे राहुल, चाचा संजय गांधी की तर्ज पर करेंगे ये काम

Rahul Gandhi हार के बाद 10 जुलाई को अमेठी में - पार्टी कार्यकर्ताओं से करेंगे मुलाकात  
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अमेठी

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Karishma Lalwani

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Updated: 9 Jul 2019, 2:06 PM IST

rahul gandhi

हार के बाद पहली बार अमेठी आएंगे राहुल, चाचा संजय गांधी की तर्ज पर करेंगे ये काम

अमेठी . लोकसभा चुनाव में मिली हार के बाद पहली बार राहुल गांधी (Rahul Gandhi) 10 जुलाई को अमेठी पहुंचेंगे। वे यहां पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान वे चुनाव में मिली हार के कारणों की समीक्षा भी करेंगे। राहुल यहां एक दिवसीय दौरे पर रहेंगे। वे कार्यकर्ताओं के अलावा आम लोगों से भी मुलाकात करेंगे। दरअसल, अमेठी के अब तक गांधी-नेहरू परिवार का गढ़ माना जाता था। लेकिन लोकसभा चुनाव में भाजपा से केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने उन्हें 55 हजार वोटों से शिकस्त दिया। राहुल अमेठी से चुनाव हार गए लेकिन केरल की वायनाड सीट से चुनाव जीतकर वे लोकसभा पहुंचने में कामयाब रहे।

हार से रिश्ते का मूल्यांकन नहीं

कांग्रेस जिला अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने बताया कि एक दिवसीय दौरे पर राहुल ग्रामसभा अध्यक्ष, न्याय पंचायत अध्यक्ष, पार्टी के वरिष्ठ नेता फ्रंटल संगठन के पदाधिकारी के साथ बैठक करेंगे। साथ ही कुछ परिवारों से भी मुलाकात करेंगे। योगेंद्र मिश्रा ने कहा कि अमेठी हनेशा राहुल का स्वागत करेगी। वे यहां अपने घर और परिवार के बीच आ रहे हैं। उनके आने से कार्यकर्ताओं में जोश का संचार रहेगा। कार्यकर्ताओं को ऊर्जा मिलेगी और अमेठी फिर से उनकी तरफ आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि अमेठी राजीव गांधी से लेकर संजय गांधी का समय देखा है। गांधी परिवार का जो रिश्ता अमेठी से है, उसका चुनाव में हार जीत से कोई मूल्यांकन नहीं हो सकता।

अध्यक्ष पद से इस्तीफा

गौरतलब है कि चुनाव में कांग्रेस पार्टी को मिली हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए राहुल गांधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की। उन्होंने कहा कि पार्टी को मजबूत करने के लिए कड़े फैसले लेने की जरूरत है। हालांकि, राहुल ने औपचारिक तौर पर इस्तीफे की घोषणा तो कर दी है लेकिन पार्टी ने औपचारिक तौर पर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। वहीं, राहुल के बाद कई अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी इस्तीफा दिया।

चाचा की राह पर राहुल

हार के बाद भी राहुल ने कांग्रेस के इस दुर्ग को न छोड़ने का फैसला किया है। यह ठीक वैसा ही है जैसा कि इमरजेंसी के बाद 1977 के लोकसभा चुनाव में संजय गांधी यहां से चुनाव हार गए थे। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और वे लगातार अमेठी आते रहे। उन्होंने अमेठी से अपने पारिवारिक रिश्तों को मजबूत किया।

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