
आगरा। भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गाँव बटेश्वर में गमगीन माहौल है। दिल्ली के एम्स में अटल बिहारी वाजपेयी ने अंतिम सांस ली तो उनके गाँव बटेश्वर में महादेव मंदिर पर एक संत ने अन्न जल त्याग दिया।
अटल जी से था दिल का रिश्ता
अन्न जल त्यागने वाले संत ने अपना नाम नेपाल दास बताया। उनकी दिल्ली के कनॉटप्लेस में टेलर की दुकान थी। उनके पिता कपड़े सिलते थे। पिता का हाथ बंटाने के लिए नेपाल दास भी उनके साथ दुकान पर बैठते थे। ये बात 1984 की है। जब अटल बिहारी वाजपेयी उनकी दुकान पर कपड़े सिलाने के लिए आए थे, तब वह बालक थे। इसलिए अटल जी का उनके सिर पर हाथ फिराना दिल में घर गया। अटल जी के साथ खून का रिश्ता न होते हुए भी एक अनमोल रिश्ता बन गया, जिसको वे कभी नहीं भुला पाए।
लगा गहरा आघात
जिस समय अटल जी ने एम्स में इस दुनिया को अलविदा कहा, उस समय संत नेपाल दास उनके पैतृक गाँव बटेश्वर में मौजूद थे। संत नेपाल दास ने बताया की वो इसे अपना सौभाग्य मानते हैं कि अटल जी की जन्मभूमि से उनको अलविदा कहा है। अटल जी के जाने से जो क्षति हुई है, उसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता है।
संत ने कहा जब परिवार में किसी की मृत्यु हो जाती है तो भूख-प्यास कहां लगती है। संत की यह बात सुनकर गाँव के लोगों ने उन्हें जल दिया तो उन्होंने कहा कि अटल जी की अंत्येष्टि के बाद होने वाले सभी संस्करों से निवृत्त होने के बाद ही भोजन और पानी ग्रहण करेंगे।