
अयोध्या : अयोध्या में राम मंदिर के चंदे को लेकर चल रही बहस के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से पेश किए गए वित्तीय विवरण में बताया गया है कि 1 अप्रैल 2025 से 28 फरवरी 2026 के बीच ट्रस्ट को ₹82.78 करोड़ का चढ़ावा प्राप्त हुआ। ये आंकड़े 21 मार्च को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की कार्यकारिणी समिति की बैठक में प्रस्तुत किए गए।
यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब मंदिर के चंदे को लेकर विभिन्न आरोपों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा हो रही है। हालांकि इन आरोपों की अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ट्रस्ट के अनुसार, श्रद्धालुओं ने राम मंदिर में स्थापित दानपात्रों के माध्यम से ₹54.79 करोड़ का योगदान दिया, जबकि मंदिर परिसर में संचालित नकद काउंटरों के जरिए ₹18.88 करोड़ प्राप्त हुए। ऑनलाइन दान के रूप में ₹28.33 करोड़ मिले, जबकि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) के तहत ₹0.78 करोड़ का योगदान प्राप्त हुआ।
दान के अलावा ट्रस्ट ने इसी अवधि में अपने बैंक जमा पर ब्याज के रूप में ₹138.03 करोड़ की आय अर्जित की। ट्रस्ट के खाते अयोध्या स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक में संचालित हैं।
बैठक में ट्रस्ट अधिकारियों ने बताया कि राम मंदिर निर्माण कार्य पर खर्च के बाद लगभग ₹2,100 करोड़ की राशि शेष रही, जिसे बैंकों में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में निवेश किया गया है। ब्याज से हुई आय को जोड़ने पर 11 महीने की अवधि में ट्रस्ट की कुल आय ₹220.81 करोड़ रही।
ट्रस्ट ने इस अवधि के दौरान ₹364.44 करोड़ के व्यय का विवरण भी प्रस्तुत किया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट 15 सदस्यीय संस्था है, जो राम मंदिर के निर्माण और प्रशासन की जिम्मेदारी संभाल रही है। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास हैं, जबकि चंपत राय महासचिव के पद पर कार्यरत हैं। मंदिर निर्माण समिति की अध्यक्षता नृपेंद्र मिश्र कर रहे हैं, जो पूरे परियोजना कार्य की निगरानी करते हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2019 के फैसले के बाद फरवरी 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी। इस स्वायत्त संस्था को राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।