
Ayodhya Ram Mandir Controversy: अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर में चढ़ावे चोरी मामले में पूर्व महासचिव चंपत राय का बचाव किया है। लेकिन, उन्होंने कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि उनकी कोई गलती नहीं है, इसलिए वह इस्तीफा क्यों देंगे? उन्होंने कहा कि उनका संबंध खाते में आए पैसे की देखरेख से रहा है, गिनती से नहीं। गिरि ने एबीपी न्यूज़ से बातचीत में ऐसा कहा।
गोविंद देव गिरि ने बताया कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले ही चंपत राय को चढ़ावे चोरी की भनक लग गई थी। उन्हें 4 और 5 जून को ही इसकी जानकारी मिल चुकी थी। शुरुआत में चंपत राय इस असमंजस में थे कि मामले की शिकायत कहां और किसके पास की जाए। इसी उलझन के कारण उचित कदम उठाने में उन्हें और ट्रस्ट को थोड़ी देरी हो गई। हालांकि जब उन्हें इस बात का पूरी तरह एहसास हुआ कि यह एक बेहद गंभीर और बड़ा मुद्दा है तो उन्होंने खुद आगे आकर इस मामले की जांच करने की मांग उठाई।
ट्रस्ट की बैठक में चढ़ावा चोरी विवाद के चलते चंपत राय का महासचिव पद से और अनिल मिश्रा का ट्रस्टी पद से इस्तीफा आधिकारिक रूप से स्वीकार कर लिया गया। साथ ही कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया है। गोविंद देव गिरि ने कहा कि हम चंपत राय को एक अत्यंत सज्जन व्यक्ति मानते हैं। हम तीन दशकों से एक दूसरे को जानते हैं। उनकी एकमात्र गलती यह थी कि उन्होंने गलत लोगों पर लंबे समय तक भरोसा किया और उन्हीं लोगों ने ट्रस्ट के साथ विश्वासघात किया।
गोविंद देव गिरि ने चंपत राय के व्यवहार को लेकर भी एक बड़ी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि चंपत राय स्वभाव से भोले जरूर हैं, लेकिन वे उन्हें दी गई सूचनाओं को अक्सर अनदेखा कर देते थे। उन्हें यह भ्रम था कि सारा काम वे अकेले ही संभाल लेंगे, और यह भी एक तरह की लापरवाही ही है। यह उनके स्वभाव की कमी है, न कि चारित्रिक दोष। कहना होगा कि चंपत राय पर अहंकार हावी रहा।
गिरि ने आगे कहा कि चंपत राय की छवि पूरी तरह से बेदाग हैं, उन्होंने अपना पूरा जीवन राम मंदिर के पवित्र उद्देश्य के लिए समर्पित किया है। ।
कोषाध्यक्ष ने चंपत राय का बचाव जरूर किया लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि चढ़ावे के प्रबंधन की निगरानी में चंपत राय और अनिल मिश्रा की तरफ से गंभीर लापरवाही हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इतनी लंबी अवधि तक लापरवाही होना और उचित निगरानी न रखना एक बहुत गंभीर मामला है। ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए था। चंपत राय ने स्वयं इस्तीफा दिया है क्योंकि उनका मानना था कि जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हो जाती तब तक पद पर बने रहना उचित नहीं है।
अपनी जिम्मेदारी और इस्तीफे के सवाल पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि इस मामले में निश्चित तौर पर ट्रस्ट के सभी सदस्यों की लापरवाही रही है और वह अपनी भी जिम्मेदारी मानते हैं। उनका मुख्य काम चढ़ावे और धन की गिनती करना और उसका लेखा-जोखा रखने का था। हालांकि, इस्तीफा देने के सवाल पर उन्होंने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि जब इस चढ़ावा घोटाले से मेरा कोई लेना देना ही नहीं है तो मैं इस्तीफा क्यों दूं।