
Raj Kundra React On Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज के बॉलीवुड में भी कई भक्त हैं जो उन्हें पूरी श्रद्धा और भाव से मानते हैं। विराट कोहली और अनुष्का शर्मा के बाद शिल्पा शेट्टी और राज कुंद्रा भी प्रेमानंद महाराज से मिलकर उनके मुरीद हो गए। राज कुंद्रा ने उन्हें अपनी किडनी डोनेट करने तक की बात कह दी थी, जिसके जवाब में प्रेमानंद महाराज ने मना कर दिया और कहा कि जब तक वह जिंदा हैं ऐसे ही रहेंगे। इस वजह से राज कुंद्रा की काफी आलोचना भी हुई। मगर अब एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया है कि उनका मन ऐसा करने का क्यों हुआ था। इसके पीछे कि असली वजह क्या थी।
राज कुंद्रा खुद एक बड़े बिजनेसमैन हैं वह अक्सर कई इवेंट में नजर आते हैं। ऐसे में अब राज कुंद्रा ने 'फिल्मीज्ञान' को एक इंटरव्यू दिया। जिसमें उन्होंने बताया, “मैं बहुत लंबे समय से एक आध्यात्मिक गुरु को फॉलो कर रहा था। दरअसल, पिछले दो सालों से, मैं प्रेमानंद जी के मैसेज को रीपोस्ट कर रहा हूं और मुझे मौका मिला। वह एक दिन में सिर्फ 50 से 60 लोगों से ही मिलते हैं और यहां आने के लिए करीब एक साल की वेटिंग लिस्ट होती है। इसलिए हमें एक मौका मिला, जहां शिल्पा और मैं उनसे मिलने जा सके और ये मेरी लाइफ का ये सबसे शानदार दिन था।”
राज कुंद्रा ने आगे कहा, “अक्सर लोग प्रेमानंद महाराज के सामने सवाल पूछकर ज्ञान लेते हैं, लेकिन जब मैं गया तो मैं शॉक्ड हो गया। मैं कुछ नहीं कह सका। हम सभी सोचते हैं कि हमारे जीवन में समस्याएं काफी ज्यादा हैं। हमें लगता है कि हमारे पास पैसे नहीं हैं, या हम कोई लग्जरी आइटम खरीदना चाहते हैं पर प्रेमानंद जी, पिछले 20 सालों से, अपनी दो किडनी खराब होने के बावजूद, दिन में 5 घंटे डायलिसिस पर रहकर, मुस्कुराते हुए, खुश रहते हैं, ये कितना बढ़िया मैसेज है हमारे लिए।”
राज कुंद्रा ने आगे ये भी बताया, “पहली बार जब मैं प्रेमानंद जी महाराज से मिला तो मुझे उन्हें कुछ देने की इच्छा हुई। तब मैंने उनसे कहा कि सर मैं अपनी एक किडनी आपको दान करना चाहता हूं। मुझे यकीन है कि मेरे जैसे हजारों लोग होंगे लेकिन लोगों ने मुझे इसके लिए भी ट्रोल करना शुरू कर दिया और उस समय मैं ये सोच रहा था कि मेरी किडनी है, मैं इसे जिसे चाहूं दे सकता हूं, आप इसे पीआर प्रमोशन कह रहे हैं, लेकिन आप तो अपना फोन भी अंदर नहीं ले जा सकते और वो लोग जो चाहे वो दिखा सकते हैं। अब उन्होंने उस बात को ही दिखाया वो भी ये कहते हुए कि इनकी भावना-भक्ति देखिए, जो गुरुजी के लिए है। इसलिए मुझे कोई फर्क नहीं पड़ा कि कौन क्या सोचता है।”