
Auto Loan की आखिरी EMI भरने के बाद ज्यादातर लोगों को लगता है कि अब वाहन पूरी तरह उनका हो गया है। लेकिन असल में ऐसा नहीं है। एक जरूरी प्रोसेस अभी बाकी रहता है। वह है वाहन की आरसी (RC) से हाइपोथिकेशन को हटवाना। अगर यह काम नहीं किया जाता है तो भविष्य में वाहन बेचने, इंश्योरेंस क्लेम लेने और दस्तावेजों से जुड़े कई कामों में परेशानी आ सकती है।
हाइपोथिकेशन का मतलब है कि वाहन पर बैंक या फाइनेंस कंपनी का अधिकार है, क्योंकि उसने वाहन खरीदने के लिए लोन दिया था। लोन पूरा चुकाने के बाद भी जब तक RC से हाइपोथिकेशन नहीं हटता, तब तक रिकॉर्ड में बैंक का नाम बना रहता है। ऐसे में वाहन का मालिकाना हक पूरी तरह से खरीदने वाले के पास नहीं होता और इससे भविष्य में कई तरह की समस्याएं आती हैं। सरल शब्दों में कहें तो ऑटो लोन में गाड़ी की आरसी लोन देने वाली संस्था के पास गिरवी रखी होती है। लोन चुकाने के बाद आरसी वापस लेना जरूरी है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार, RC में हाइपोथिकेशन बने रहने से वाहन बेचने और इश्योरेंस क्लेम में सबसे ज्यादा समस्या आती है। कोई भी खरीदार या कोई डीलर अक्सर ऐसे वाहन को खरीदने से बचते हैं और यदि खरीदने को तैयार भी होता है तो वाहन की कीमत पर भी असर पड़ सकता है। इंश्योरेंस क्लेम के मामले में भी इसका असर पड़ता है। यदि वाहन चोरी हो जाए या किसी दुर्घटना में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो जाए तो बीमा कंपनी पहले किसी भी क्लेम राशि का भुगतान बैंक को करेगी और उसके बाद बची हुई राशि वाहन मालिक को मिलेगी। इसलिए RC रिकॉर्ड को अपडेट रखना जरूरी है।
वाहन लोन पूरी तरह से चुकाने के बाद बैंक या फाइनेंस कंपनी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), लोन क्लोजर लेटर और फॉर्म 35 प्राप्त करें। Form 35 बैंक की ओर से हस्ताक्षर और मुहर के साथ जारी किया जाता है। इसका उपयोग RC से हाइपोथिकेशन हटाने के लिए किया जाता है।
हाइपोथिकेशन हटाने के लिए कुछ जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है-
इसके बाद वाहन पोर्टल पर जाकर वाहन का रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करें और हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन ऑप्शन चुनें। जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद पोर्टल द्वारा लागू शुल्क दें और आवेदन जमा करें। दस्तावेजों की जांच पूरी होने के बाद नई RC जारी की जाती है, जिसमें बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम हटा दिया जाता है।