
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कभी करोड़ों रुपये की संपत्ति और इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबार के मालिक रहे 70 वर्षीय राजकुमार सक्सेना की बीमारी के बाद मौत हो गई, लेकिन उनके अंतिम संस्कार के लिए परिवार का कोई भी सदस्य आगे नहीं आया। राजकुमार पिछले 5 साल से वृद्धाश्रम में रह रहे थे। बीमारी के चलते 11 अगस्त को सैफई मेडिकल कॉलेज में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने पत्नी और बेटे को इसकी जानकारी दी, लेकिन दोनों ने शव लेने से इनकार कर दिया। इसके बाद रक्तदाता समूह के सदस्यों ने आगे आकर शनिवार को यमुना तट पर पूरे रीति-रिवाज के साथ उनका अंतिम संस्कार किया।
गाजियाबाद के नंदग्राम में रहने वाली पत्नी ने कहा कि उनका रिश्ता करीब 20 साल पहले ही टूट गया था और अब उनका कोई मतलब नहीं है। राजकुमार के परिवार में पत्नी आशा के अलावा तीन बेटे और एक बेटी हैं। पत्नी अपने बच्चों के साथ लंबे समय से अलग रह रही थीं। उन्होंने अपने दो बेटों और एक बेटी की शादी भी कर दी है, जबकि एक बेटे की शादी अभी बाकी है।
राजकुमार के पड़ोसी के मुताबिक, करीब 20 साल पहले पैसे को लेकर परिवार में विवाद शुरू हुआ था। इसके बाद राजकुमार अलग रहने लगे। उनके परिवार के पास मारहरा क्षेत्र में करीब तीन से चार करोड़ रुपये की संपत्ति बताई जाती है। राजकुमार की इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान भी थी, लेकिन कारोबार ज्यादा नहीं चल सका। परिवार से अलग रहने के बाद राजकुमार ने धीरे-धीरे अपनी संपत्ति बेचनी शुरू कर दी।
सैफई मेडिकल कॉलेज के एक डॉक्टर ने बताया कि राजकुमार के बेटे की फोन पर काउंसिलिंग की गई, लेकिन इसके बाद भी वह पिता के अंतिम संस्कार के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद रक्तदाता समूह की ओर से गाजियाबाद में बेटे के घर टीम भेजी गई कि शायद उनके परिवार को अंतिम संस्कार के लिए मान जाए, लेकिन 11 अगस्त से ही घर पर ताला लगा हुआ था।
राजकुमार का शव सैफई मेडिकल कॉलेज की मोर्चरी में रखा गया था। 72 घंटे पूरे होने के बाद पुलिस ने रक्तदाता समूह के सदस्यों से संपर्क किया। समूह के सदस्य आगे आए और शनिवार को यमुना तट पर पूरे रीति-रिवाज के साथ राजकुमार का अंतिम संस्कार किया। रक्तदाता समूह के सदस्य शरद तिवारी ने बताया कि वृद्ध के पुत्रों ने अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया। इसके बाद उनकी टीम ने शव का अंतिम संस्कार करने की जिम्मेदारी उठाई।