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चमोली टनल हादसे में 8 मजदूरों की मौत, मृतकों के परिजनों के लिए एक करोड़ मुआवजे की मांग पर मंत्री का घेराव

Uttarakhand Tunnel Accident: चमोली टनल हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, दो अब भी लापता हैं। श्रमिकों ने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ मुआवजा देने की मांग की।
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Chamoli Tunnel Accident

टनल हादसे में 8 मजदूरों की मौत (X Photo Asif Ansari)

Chamoli Tunnel Accident News: उत्तराखंड के चमोली में हुए टनल हादसे में मृतक मजदूरों की संख्या बढ़कर 8 हो गई है। शनिवार को रेस्क्यू टीम ने एक और मजदूर का शव टनल से बाहर निकाला। हादसे के बाद से दो मजदूर अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश जारी है। टनल के अंदर पानी और मलबा होने से बचाव अभियान में मुश्किलें आ रही हैं। इसी बीच मौके पर पहुंचे आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक का परियोजना के श्रमिकों ने घेराव किया। श्रमिकों ने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने और हादसे की निष्पक्ष जांच की मांग की।

टनल में फंसे दो मजदूरों की तलाश जारी

हादसे के समय गुरुवार शाम करीब 7 बजे टनल में 22 मजदूर शिफ्ट में काम कर रहे थे। इनमें से 8 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 घायल मजदूरों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। दो अन्य मजदूरों का अभी पता नहीं चल पाया है। बचाव दल लगातार उन संभावित स्थानों पर पहुंचने की कोशिश कर रहा है, जहां मजदूर फंसे हो सकते हैं।

चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कहा कि टनल के अंदर लापता मजदूर फंसे हो सकते हैं। जिला प्रशासन, पुलिस, स्टेट डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (SDRF), नेशनल डिज़ास्टर रिस्पॉन्स फ़ोर्स (NDRF) और दूसरे विभाग की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन को कोऑर्डिनेट कर रही हैं।

हादसे में इन मजदूरों की मौत

उत्तराखंड स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर (SEOC) के अधिकारियों ने मृतकों की पहचान प्रदीप पंवार, मुकेश सिंह, दुर्लभ शर्मा, विजय हंसदा, जितेंद्र कुमार, लोकेश्वर, भुवनेश्वर और देवनाथ के तौर पर की है। शुरुआती जांच में हादसे की वजह टनल के अंदर अचानक पानी और मलबा आने को माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार बारिश से भरा एक्वीफर 3 किमी लंबी टनल की छत से एंट्रेंस से करीब 1.44 किमी दूर टूट गया था।

मंत्री के पहुंचते ही मजदूरों ने घेरा

आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बचाव अभियान का जायजा लिया और अधिकारियों से रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी ली। इस दौरान परियोजना में काम करने वाले श्रमिकों ने मंत्री का घेराव कर दिया। श्रमिकों ने मृतकों के परिजनों को एक करोड़ रुपए मुआवजा देने और हादसे की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी।

मजदूरों की मांग के बाद मंत्री ने वीपीएचईपी की कंपनी टीएचडीसी को मुआवजा देने और जांच पूरी होने तक परियोजना का काम बंद रखने के निर्देश दिए।

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