
COPD Cause: आजकल की भागदौड़ और प्रदूषण के बीच हमारे फेफड़ों (Lungs) पर सबसे ज्यादा मार पड़ रही है। बहुत से लोग सोचते हैं कि फेफड़ों की बीमारी सिर्फ उन्हीं को होती है जो सिगरेट, बीड़ी या हुक्का पीते हैं। अगर आप धूम्रपान नहीं भी करते, तब भी आप फेफड़ों की एक गंभीर बीमारी में फंस सकते हैं, जिसे क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज कहते हैं।
मेयो क्लिनिक के अनुसार, सीओपीडी फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें फेफड़े अंदर से खराब (डैमेज) हो जाते हैं। आइए NHS (नेशनल हेल्थ सर्विस) के आधार पर, समझते हैं कि यह बीमारी क्या है, क्यों होती है और इसके लक्षण क्या हैं।
COPD फेफड़ों से जुड़ी कुछ बीमारियों का एक नाम है, जो हमारे सांस लेने के रास्ते को धीरे-धीरे छोटा और तंग (संकरा) कर देती है। इसकी वजह से फेफड़ों में हवा ठीक से अंदर-बाहर नहीं आ-जा पाती और इंसान को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगती है। यह बीमारी धीरे-धीरे वक्त के साथ बढ़ती है। इसे जड़ से खत्म तो नहीं किया जा सकता, लेकिन सही समय पर इलाज मिलने से इसे काबू में जरूर रखा जा सकता है। इसमें मुख्य रूप से दो बड़ी दिक्कतें होती हैं;
1. हवा की थैलियों का खराब होना (Emphysema)- इसमें फेफड़ों के अंदर जो छोटी-छोटी हवा की थैलियां होती हैं, वे डैमेज हो जाती हैं।
2. सांस की नली में सूजन (Chronic Bronchitis)- इसमें सांस ले जाने वाली नलियों में लंबे समय तक सूजन रहती है और गाढ़ा बलगम जमने लगता है।
ज्यादातर मामलों में COPD उन लोगों को होता है जो बहुत ज्यादा बीड़ी-सिगरेट पीते हैं। आप जितने लंबे समय तक धूम्रपान करेंगे, खतरा उतना ही ज्यादा होगा। लेकिन NHS के मुताबिक, जो लोग स्मोकिंग नहीं करते, वे भी इन कारणों से इसका शिकार हो सकते हैं;
1. कामकाज की जगह का धूल-धुआं- अगर आप किसी ऐसी जगह काम करते हैं जहां लगातार धूल-मिट्टी उड़ती है, कोयले या पत्थर का काम होता है, या फिर केमिकल (रसायनों) का तेज धुआं निकलता है, तो यह आपके फेफड़ों को अंदर से खोखला कर सकता है।
2. घर के चूल्हे का धुआं- गांवों या कस्बों में आज भी जहां बंद कमरों या रसोई में लकड़ी और गोबर के उपलों (कंडों) पर खाना पकाया जाता है, वहां का गाढ़ा धुआं भी महिलाओं और बच्चों में इस बीमारी की बड़ी वजह बनता है।
3. जींस की गड़बड़ी (Genetic)- कुछ बहुत ही दुर्लभ मामलों में यह बीमारी परिवार में एक से दूसरे को खानदानी तौर पर भी मिल सकती है, जिससे फेफड़े बचपन से ही कमजोर होते हैं।
डिस्क्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प है। लेकिन पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।