स्वास्थ्य

Dhurandhar 2 Mustafa Ahmed: धुरंधर 2 के एक्टर को थी यह गंभीर बीमारी, कहीं आपके बच्चे के साथ तो ऐसा नहीं?

Dhurandhar 2 Mustafa Ahmed: धुरंधर 2 के एक्टर मुस्तफा अहमद ने बचपन में डिस्लेक्सिया से जंग जीती। जानिए क्या है यह बीमारी, इसके लक्षण और कैसे सही समय पर ठीक कर अपने बच्चे की जान बचा सकते हैं।
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Mar 25, 2026
Dhurandhar 2 actor Rizwan dyslexia
Mustafa Ahmed dyslexia (source: instagram, freepik)

Dhurandhar 2 Mustafa Ahmed: धुरंधर 2 के रिजवान यानी मुस्तफा अहमद की एक्टिंग और उनकी फिटनेस का हर कोई दीवाना है। मुस्तफा ने ऋतिक रोशन जैसे बड़े सितारों को ट्रेनिंग दी है। मुस्तफा ने हाल ही में अल्फा कोच पॉडकास्ट पर बताया कि बचपन में वह डिस्लेक्सिया नाम की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्हें पढ़ाई-लिखाई में कमजोर और डफर समझा जाता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। मुस्तफा की यह कहानी उन लाखों माता-पिता के लिए एक सबक है जो अपने बच्चे की पढ़ाई को लेकर परेशान रहते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर यह बीमारी क्या है और एक्टर ने इसे कैसे सही किया।

क्या है डिस्लेक्सिया?

डिस्लेक्सिया (Dyslexia) कोई पागलपन या दिमागी कमजोरी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी बीमारी है जिसमें बच्चे का दिमाग शब्दों और अक्षरों को अलग तरीके से प्रोसेस करता है। इसका मतलब है कि जो शब्द आम इंसान को सीधे दिखते हैं, इस बीमारी से जूझ रहे बच्चे को वो उल्टे दिखाई दे सकते हैं। मुस्तफा ने बताया कि वह बचपन में होनहार छात्र नहीं थे, क्योंकि उन्हें पढ़ने और लिखने में बहुत दिक्कत होती थी। उन्हें अक्सर सुस्त या पढ़ाई में जी चुराने वाला मान लिया जाता था, जो कि गलत था।

मुस्तफा ने कैसे ठीक की अपनी यह बीमारी?

मुस्तफा ने पॉडकास्ट में बताया कि भले ही वह किताबों में कमजोर थे, लेकिन फिजिकल एक्टिविटी जैसे स्पोर्ट्स और डांस में वह बहुत माहिर थे। उन्होंने अपनी कमजोरी को ही अपनी ताकत बनाया। आज वह बड़े-बड़े सुपरस्टार्स को ट्रेनिंग देते हैं। उनका कहना है कि डिस्लेक्सिया होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि बच्चा बुद्धिमान नहीं है। अल्बर्ट आइंस्टीन और अभिषेक बच्चन जैसे कई दिग्गज भी इस स्थिति से गुजर चुके हैं और आज दुनिया में उनका बड़ा नाम है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • अल्फाबेट में कंफ्यूजन: अल्फाबेट के अक्षरों को समझने में गलती करना।
  • पढ़ने में अटकना: उम्र के हिसाब से शब्दों को जोड़कर न पढ़ पाना।
  • याद रखने में दिक्कत: बार-बार प्रैक्टिस के बाद भी अक्षरों या स्पेलिंग को भूल जाना।
  • बोलने में हिचकिचाहट: मिलते-जुलते शब्दों को बोलने में अटकना।
  • बहाने बनाना: होमवर्क या रीडिंग के नाम पर पेट दर्द या सिरदर्द का बहाना बनाना।
  • लिखने में गलती: शब्दों को आगे-पीछे लिखना या लाइन छोड़कर लिखना।

डिस्लेक्सिया का इलाज

डिस्लेक्सिया का कोई इलाज नहीं है, लेकिन सीखने में सहायता करने और पढ़ने को आसान बनाने के कई तरीके हैं। हर कोई अलग-अलग तरीके से सीखता है, लेकिन सही समय पर पहचान और सपोर्ट से इसे मैनेज किया जा सकता है।

  • डांटें नहीं, साथ दें: बच्चे को लेजी या सुस्त न कहें। उसे अहसास कराएं कि वह अकेला नहीं है।
  • स्पेशल थेरेपी: आजकल ऐसी कई तकनीकें हैं जो खेल-खेल में बच्चों को शब्द पहचानना सिखाती हैं।
  • टेक्नोलॉजी का सहारा: ऑडियो बुक्स या बोलकर लिखने वाले ऐप्स का इस्तेमाल करें।
  • मोटिवेट करें: बच्चे के टैलेंट को पहचानें जिसमें वह अच्छा है, जैसे पेंटिंग, खेल या संगीत।

डिसक्लेमरः इस लेख में दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल रोगों और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के प्रति जागरूकता लाना है। यह किसी क्वालीफाइड मेडिकल ऑपिनियन का विकल्प नहीं है। इसलिए पाठकों को सलाह दी जाती है कि वह कोई भी दवा, उपचार या नुस्खे को अपनी मर्जी से ना आजमाएं बल्कि इस बारे में उस चिकित्सा पैथी से संबंधित एक्सपर्ट या डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

Updated on:
25 Mar 2026 01:18 pm
Published on:
25 Mar 2026 01:18 pm