Karpoor Chandra Kulish: पत्रकारिता के शिखर पुरुष कर्पूर चंद्र कुलिश की जन्मशती पर देशभर में आयोजन हुए। चित्रकला, श्रमदान, वाचनालय और स्मृति स्थलों के जरिए लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके मूल्यों को पुनः संकल्पित किया।
Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: पत्रकारिता के शिखर पुरुष श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश जी की जन्मशती पर नमन, स्मृतियां चिरस्थायी…संस्कृति साधक को आदरांजलि। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में विभिन्न आयोजन।
पत्रकारिता को जनसरोकार, निर्भीकता और मूल्यों की नई दिशा देने वाले श्रद्धेय कर्पूर चन्द्र कुलिश की जन्मशती केवल एक स्मरण नहीं, बल्कि विचारों के पुनर्संकल्प का राष्ट्रीय पर्व बनकर सामने आई।
प्रदेश से लेकर देशभर में उनके नाम पर संस्थान, उद्यान और नई पहलें आकार ले रही हैं। वहीं सत्ता-विपक्ष, सामाजिक, शैक्षणिक और युवा वर्ग ने भी उन्हें भावभीनी पुष्पांजलि अर्पित की।
चित्रांकन: पाली के राजश्री पब्लिक स्कूल में शिक्षिकाओं ने कुलिश जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को रंगों के माध्यम से उकेरा।
पेंटिंग कार्यशाला: नागौर के शारदा बाल निकेतन के सहयोग से संचालित पत्रिका निःशुल्क स्कूल में बच्चों के लिए पेंटिंग कार्यशाला में कलाकार इलाहिबक्स खिलजी और प्रेमचंद सांखला ने कुलिशजी का पोर्टेट बनाकर भावांजलि दी।
कुलिश वाटिका में श्रमदान: सीकर जिले के खूड़ी बड़ी स्थित शहीद नेमीचंद राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में विकसित वाटिका का नाम 'कुलिश वाटिका' रखा गया। विद्यालय विकास समिति और मनसुख रणवा मनु स्मृति संस्थान की ओर श्रमदान भी किया गया।
चितेरे ने उकेरा चिंतनः अलवर जिला एवं सेशन न्यायालय में लिपिक अंकित सोनी ने कुलिश जी का हाइपर रियलिस्टिक स्केच बनाया।
उदयपुर में जन्मशती पर्व पर महिलाओं ने कुलिशजी के व्यक्तित्व को सराहा और नमन किया।
मांडना कला नावां शहर (नागौर) के युवा कलाकार महेश कुमावत ने पत्नी आरती कुमावत के साथ पारंपरिक मांडने की कला में कुलिश जी का सजीव चित्र उकेरा।
वाचनालय में पढ़ेंगे विद्यार्थी: डूंगरपुर के गोवर्धन विद्या विहार संस्कृत शिक्षण संस्थान, खडगड़ा में 'कर्पूर चन्द्र कुलिश वाचनालय' का शुभारंभ किया गया। वर्ष 1976 में कुलिश जी संस्थान में आए थे और उसका उल्लेख उन्होंने अपनी कृति 'मैं देखता चला गया' में भी किया है।
पीपल के पत्ते पर पत्रकारिता का 'वटवृक्ष': बीकानेर की चित्रकार मिट्ठू मेहरा ने पीपल के पत्ते पर कुलिश जी के चित्र को उकेरा है। उनका मानना है कि सच और निष्पक्ष पत्रकारिता समाज के लिए सदैव मार्गदर्शक रहती है।
सुकून का ठिकाना: जयपुर में कुलिश स्मृति वन प्रकृति प्रेमियों के लिए है सुकून का ठिकाना। सुबह-शाम जुटते हैं हजारों।
शिला पर उकेरा वज्र सा किरदार: 'कर्पूर चन्द्र कुलिश स्मृति उद्यान' में युवा चित्रकार सिद्धार्थ राहुरे ने कुलिश जी का चित्र बनाया।