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कर्पूर चंद्र कुलिश जन्मशती वर्ष: अभाव से आत्मनिर्भरता तक…70 साल में ऐसे बदला राजस्थान का चेहरा, पढ़ें ऐतिहासिक सफर

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: राजस्थान ने 70 वर्षों में अभाव से आत्मनिर्भरता तक लंबी विकास यात्रा तय की है। 1956 में सीमित संसाधनों वाले राज्य ने चंबल परियोजना, कोटा बैराज और इंदिरा गांधी नहर से सिंचाई व ऊर्जा में क्रांति लाई। उद्योग, पर्यटन, डिजिटल सेवाएं और सौर ऊर्जा के विस्तार के साथ आज राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है।

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जयपुर

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Arvind Rao

Mar 20, 2026

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year

Karpoor Chandra Kulish 100th Birth Year: 1956 में रियासतों के पुनर्गठन के बाद बना राजस्थान भौगोलिक रूप से विशाल, लेकिन संसाधनों और आधारभूत ढांचे के मामले में अन्य राज्यों से पीछे था। प्रदेश के सामने सबसे बड़ी चुनौती पानी, सड़क और ऊर्जा जैसी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की थी।

शुरुआती दशकों में सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं और ग्रामीण विकास को प्राथमिकता दी। चंबल घाटी परियोजना और कोटा बैराज जैसे प्रोजेक्ट से सिंचाई और बिजली की नई संभावनाएं खुलीं।

इसके बाद इंदिरा गांधी नहर परियोजना ने पश्चिमी राजस्थान की तस्वीर बदल दी। कोटा, भीलवाड़ा और जयपुर जैसे शहर औद्योगिक केंद्र बने। हैरिटेज और खनिज संपदा के कारण राजस्थान अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ।

साल 1956-65: एकीकृत राज्य से विकास की नींव तक

1956 में राज्यों के पुनर्गठन के बाद राजस्थान एकीकृत प्रशासनिक ढांचे के साथ नए दौर में प्रवेश कर चुका था। विशाल भौगोलिक क्षेत्र, कम बारिश और कमजोर आधारभूत संरचना राज्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी। इसलिए शुरुआती दशक का फोकस विकास की मजबूत नींव तैयार करने पर रहा।

सरकार ने सबसे पहले सिंचाई और पानी पर ध्यान दिया। चंबल घाटी परियोजना का काम तेज हुआ और 1960 में कोटा बैराज तैयार हुआ, जिससे कोटा, बूंदी और आसपास के इलाकों में सिंचाई का नया नेटवर्क बना। पश्चिमी राजस्थान में जवाई बांध जैसे प्रोजेक्ट ने भी पानी की समस्या कम करने में भूमिका निभाई।

  • राज्य की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि आधारित थी, इसलिए कृषि उत्पादन बढ़ाने के प्रयास किए गए। सिंचाई क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ा और खेती में नई तकनीकों के प्रयोग की शुरुआत हुई।
  • यानी यह दशक राजस्थान के लिए बड़े बदलावों की शुरुआत का समय था। जब पानी, सड़क और प्रशासनिक ढांचे की बुनियाद रखी गई, जिसने आगे आने वाले दशकों के विकास की दिशा तय की।
  • ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के जरिए गांवों में सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार शुरू हुआ।
  • इस दौर में सामुदायिक विकास ब्लॉकों की स्थापना की गई, जिनके जरिए कृषि विस्तार और ग्रामीण योजनाएं लागू की गई।

प्रमुख उपलब्धियां…

  • 1960 में कोटा बैराज बांध बनकर तैयार हुआ, जिससे हाड़ौती में सिंचाई का नया नेटवर्क बना और खेत सरसब्ज हुए
  • कोटा वैराज बनने से ग्रंथल कमांड क्षेत्र में सिंचाई नेटवर्क शुरू
  • जवाई बांध से पश्चिमी राजस्थान में सिंचाई और पेयजल व्यवस्था मजबूत
  • सामुदायिक विकास कार्यक्रमों के जरिए ग्रामीण विकास योजनाओं की शुरुआत

साल 1966-75: मरुस्थल में हरियाली-उद्यम की शुरुआत

  • 1969 में राजस्थान राज्य विकास एवं निवेश निगम की स्थापना के साथ हुई, नए उद्योगों की शुरुआत
  • 1960 के दशक के अंत तक राजस्थान को यह समझ आ गया था कि स्थाई विकास का रास्ता पानी और कृषि से होकर ही जाता है। इसी दौर में देश में हरित क्रांति की शुरुआत हुई और राजस्थान ने भी इसका लाभ उठाना शुरू किया।
  • उन्नत बीज, उर्वरक और आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रयोग बढ़ने लगा। हालांकि, असली परिवर्तन पश्चिमी राजस्थान में शुरू हुई राजस्थान नहर परियोजना से आया, जिसे बाद में इंदिरा गांधी नहर कहा गया।
  • इस नहर का निर्माण 1950 के दशक में शुरू हुआ था, लेकिन 1960-70 के दशक में इसका प्रभाव दिखने लगा।

प्रमुख उपलब्धियां…

  • हरित क्रांति और नहर परियोजनाओं ने बदली खेती की तस्वीर
  • राजस्थान नहर (इंदिरा गांधी नहर) परियोजना से पश्चिमी राजस्थान में सिंचाई का विस्तार
  • हरित काति तकनीकों से गेहूं उत्पादन और कृषि उत्पादकता में वृद्धि
  • जयपुर और कोटा में छोटे-मध्यम उद्योगों का विकास शुरू

साल 1976-85: उद्योग और ऊर्जा का पूरे राज्य में विस्तार

  • 1978- खनिज एवं खनन निगम बना
  • 1982- धौलपुर जिला
  • 1970 के दशक के बाद राजस्थान ने उद्योग और ऊर्जा के क्षेत्र में भी मजबूत कदम बढ़ाने शुरू किए।
  • कोटा इस दौर में औद्योगिक शहर के रूप में उभरा। यहां उर्वरक इंजीनियरिंग और रसायन उद्योगों का विकास हुआ।
  • नहरों और बांधों के जरिए सिंचित क्षेत्र धीरे-धीरे बढ़ता गया
  • खेती के साथ उद्योगों ने भी पकड़ी रफ्तार

प्रमुख उपलब्धियां…

  • भीलवाड़ा में टेक्सटाइल उद्योग तेजी से बढ़ा
  • चंबल घाटी परियोजना के तहत बने बांधों से बिजली उत्पादन बढ़ा
  • पर्यटन उद्योग के रूप में जयपुर-उदयपुर-जैसलमेर उभरे

साल 1986-95: उत्पादन क्षमता हुई दोगुनी, नए जिले बने

  • 4 नए जिले बारां, दौसा, राजसमंद और हनुमानगढ़
  • नई सिंचाई परियोजनाओं और बांधी से कई क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बेहतर हुई। इससे कृषि उत्पादन में सुधार हुआ। बीते दशक से खाद्यान्न क्षेत्र में 30 फीसदी का इजाफा।
  • पर्यटन उद्योग भी तेजी से बढ़ने लगा। ऐतिहासिक विरासत, महल और किले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने लगे। कई शहरों में शहरी विकास और आधारभूत ढांचे का विस्तार हुआ।
  • पानी और विरासत ने अर्थव्यवस्था को दी नई दिशा
  • सड़कों का जाल पूरे राज्य में फैला। सड़कों की लंबाई 120000 किमी हुई। 75% गांवों में बिजली पहुंची। सीमेंट उत्पादन में 200% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

प्रमुख उपलब्धियां…

  • इंदिरा गांधी नहर के विस्तार से मरुस्थलीय क्षेत्रों में खेती बढ़ी
  • 100 से ज्यादा औद्योगिक क्षेत्र प्रदेश भर में विकसित किए रीको ने
  • शिक्षा-साक्षरता 38% और स्वास्थ्य केंद्र 2500 से ज्यादा हुए

यह दशक राजस्थान की उस पहचान को मजबूत करने वाला रहा, जिसमें पानी और पर्यटन दोनों विकास के महत्वपूर्ण आधार बने। इसी दशक में शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती देने के प्रयास तेज हुए, जिसका सीधे तौर पर सामाजिक विकास पर प्रभाव हुआ।

साल 1996-05: डिजिटलीकरण की शुरुआत

1997 में करौली नया जिला बना। आर्थिक उदारीकरण के चलते राजस्थान में निजी निवेश और उद्योगों के लिए नए अवसर खुलने लगे। संगमरमर, चूना पत्थर और अन्य खनिजों के उत्पादन में राज्य अग्रणी बनने लगा।
देश का सबसे बड़ा सीमेंट उत्पादक राज्य बना। जयपुर से दुबई के लिए हवाई सेवा का शुभारंभ होने से अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी बढ़ी। ई-मित्र सेवा शुरू, सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण।

  • संगमरमर और सीमेंट उद्योग में राजस्थान अग्रणी
  • सड़क और शहरी आधारभूत ढांचे का विस्तार
  • एमएनआईटी जयपुर और एनएलयू जोधपुर शुरू
  • खनिज संपदा के कारण देश के प्रमुख खनन राज्यों में शामिल

साल 2006-15: बड़े शहरों ने रखे बड़े कदम

इस दशक में राजस्थान में बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया। ग्रामीण सड़क नेटवर्क का विस्तार हुआ और कई गांवों तक पक्की सड़कें पहुंची। बिजली उत्पादन और वितरण प्रणाली मजबूत हुई। ग्रामीण क्षेत्रों में भी बिजली आपूर्ति में सुधार हुआ।

जयपुर में विशेष आर्थिक क्षेत्र की स्थापना हुई। भामाशाह व निःशुल्क दवा योजनाओं के जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास कार्यक्रमों को गति मिली। डीबीटी की शुरुआत। 2008 में प्रतापगढ़ नया जिला बना।

  • आईआईटी और एम्स जोधपुर, आईआईम-उदयपुर व आरटीयू कोटा स्थापित
  • जयपुर में मेट्रो रेल का शुभारंभ
  • बिजली उत्पादन और वितरण प्रणाली मजबूत

साल 2016-25: बड़ी छलांग से देश में टॉपर

इस दशक में राजस्थान ने आधुनिक अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए। राजस्थान ने 2024-25 में 11 राष्ट्रीय योजनाओं में टॉप रैंक हासिल की।

दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से नए औद्योगिक क्षेत्रों के अवसर खुले। जयपुर, उदयपुर, कोटा और अजमेर को स्मार्ट सिटी बनाने की पहल हुई। 2024 में फलौदी, ब्यावर, सलूंबर, बालोतरा, डीग, खैरथल-तिजारा, कुचामन-डीडवाना और कोटपूतली-बहरोड नए जिले।

  • सौर ऊर्जा उत्पादन में राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में शामिल
  • उच्च शिक्षण संस्थाओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी
  • पर्यटन में पर्यटकों की संख्या का बना रिकॉर्ड