जालोर

जवान डॉक्टर बेटे की मौत का सदमा नहीं सह पाए पिता, हर दिन पोते-पोती से लिपटकर रोए, 18 दिन बाद चली गई जान

Rajasthan Emotional Story : डॉक्टर बेटे की सड़क हादसे में मौत के बाद पिता गहरे सदमे में चले गए और 18 दिन तक टूटे रहे। आखिरकार यह दर्द सहन नहीं कर पाए और हार्ट अटैक से उनका भी निधन हो गया।

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May 05, 2026
मृतक बाबूलाल-पुत्र डॉक्टर शैलेष। फाइल फोटो- पत्रिका

जालोर। सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां ऐसी छीनी कि 18 दिन के भीतर ही एक घर में दो मौते हो गईं। बेटे की असमय मौत का गहरा सदमा एक बुजुर्ग पिता सहन नहीं कर पाए और आखिरकार उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है।

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हार्ट अटैक से हुआ निधन

जानकारी के अनुसार, सांचौर क्षेत्र के दांता गांव निवासी 64 वर्षीय बाबूलाल विश्नोई का हार्ट अटैक से निधन हो गया। वे शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी थे और समाजसेवा के लिए भी पहचाने जाते थे। करीब 18 दिन पहले ही उनके बेटे डॉ. शैलेष विश्नोई (34) की पाली में सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। बेटे की मौत के बाद से बाबूलाल गहरे सदमे में थे।

हादसे में हुई थी बेटे की मौत

बताया जा रहा है कि 16 अप्रेल की रात डॉ. शैलेष अपनी पत्नी और बच्चों के साथ खाना खाकर लौट रहे थे। पाली के ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में गुर्जर हॉस्टल के पास मोड़ पर उनकी कार की डंपर से टक्कर हो गई। इस हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद गौरव सिंह घायल हो गए थे। परिजनों के मुताबिक बेटे की मौत के बाद बाबूलाल पूरी तरह टूट गए थे। उन्होंने खाना-पीना लगभग छोड़ दिया था और अक्सर अपने पोते और पोती को गले लगाकर रोते रहते थे। वे बार-बार कहते थे कि हर पिता चाहता है कि उसका बेटा उसे अंतिम समय में कंधा दे, लेकिन उन्हें अपने जवान बेटे की अर्थी उठानी पड़ी।

बेटे के लिए लिया था कर्ज

डॉक्टरों के अनुसार 3 मई की शाम उन्होंने हल्का भोजन किया, लेकिन थोड़ी देर बाद ही बेचैनी बढ़ने लगी। परिजन उन्हें अस्पताल लेकर जा रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उनका निधन हो गया। 4 मई को उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव दांता में किया गया। बाबूलाल ने अपने बेटे को डॉक्टर बनाने के लिए कर्ज तक लिया था और उसे पढ़ाई के लिए नेपाल भेजा। शैलेष ने 2021 में एमबीबीएस पूरा कर पाली में मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम शुरू किया था। अब इस परिवार में पत्नी, बहू और दो छोटे बच्चों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

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