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Murder Case: सोते समय पत्नी को करंट देकर उतारा मौत के घाट, चरित्र शंका में रची साजिश, शातिराना अंदाज में बनाया बहाना

Murder Case: कबीरधाम जिले से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां चरित्र शंका के चलते एक पति ने अपनी ही पत्नी की बेरहमी से हत्या कर दी।

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May 01, 2026
अब ताउम्र कटेगी जेल में रातें (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Murder Case: कबीरधाम जिले के लालपुर कला (पाण्डातराई) में दो साल पहले हुए प्रेम विवाह का खौफनाक अंत हुआ है। चरित्र पर संदेह के चलते अपनी पत्नी की करंट लगाकर बेरहमी से हत्या करने वाले आरोपी पति धनुक राम बर्मन को न्यायालय ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) गितेश कुमार कौशिक के न्यायालय ने बुधवार को यह फैसला सुनाते हुए आरोपी को हत्या साक्ष्य छिपाने और बिजली चोरी के गंभीर आरोपों में दोषी करार दिया।

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दो साल पहले प्रेम विवाह किया था

अतिरिक्त लोक अभियोजन संतोष देवांगन ने बताया कि आरोपी धनुक राम बर्मन और मृतिका चंद्रकांता बर्मन ने दो साल पहले प्रेम विवाह किया था, लेकिन शादी के बाद से ही आरोपी अपनी पत्नी के चरित्र पर शक करता था। 20 अगस्त 2024 की रात दोनों के बीच इसी बात पर विवाद हुआ, जिसके बाद आरोपी ने पत्नी को रास्ते से हटाने की साजिश रची। रात करीब 2 बजे जब चंद्रकांता गहरी नींद में थी तब आरोपी ने बिजली के नंगे तारों से उसके दोनों पैरों में करंट लगा दिया। पत्नी के छटपटाने के बाद भी आरोपी का दिल नहीं पसीजा और उसने गला दबाकर उसकी मृत्यु सुनिश्चित की।

करंट से मौत दिखाने की साजिश नाकाम

वारदात को दुर्घटना का रूप देने के लिए आरोपी ने शातिराना अंदाज में बिस्तर पर बिजली का बोर्ड और वायर फैला दिए ताकि लगे कि करंट लगने से मौत हुई है। उसने साक्ष्य मिटाने के लिए मुख्य वायर को घर की पेटी के पीछे छिपा दिया था। सुबह खुद ही दरवाजा तोड़कर अंदर जाने का नाटक किया, लेकिन शव पंचनामा के दौरान तहसीलदार और गवाहों ने मृतिका के शरीर पर काले निशान देखे, जिससे संदेह गहरा गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करंट से मौत की पुष्टि होने और पुलिस की बारीकी से पूछताछ के बाद आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

इन धाराओं के तहत मिली सजा

न्यायालय ने मामले की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी धनुक राम बर्मन को निम्नलिखित धाराओं में दंडित किया है। भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) हत्या के आरोप में आजीवन कारावास और 2000 रुपए अर्थदंड। धारा 238(क) के तहत साक्ष्य छिपाने के अपराध में 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 1000 रुपए अर्थदंड और विद्युत अधिनियम की धारा 135(1)(क) अवैध बिजली चोरी के लिए 3 वर्ष का सश्रम कारावास की सजा सुनाते हुए 1000 रुपए अर्थदंड लगाया।

न्यायालय ने आदेश दिया है कि सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। राज्य की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक संतोष देवांगन ने पैरवी की। आरोपी सितंबर 2024 से ही जेल में निरुद्ध था, जिसे अब सजा वारंट के साथ जिला जेल कबीरधाम भेज दिया गया है।

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Published on:
01 May 2026 06:48 pm
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