कोटा. रिश्वत लेने के 15 साल पुराने मामले में उप मुख्य स्वास्थ्य कार्यालय छबड़ा के तत्कालीन स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को अदालत ने सजा सुनाई।
कोटा . वेतन फिक्सेशन की एवज में एक हजार रुपए रिश्वत लेने के 15 साल पुराने मामले में उप मुख्य स्वास्थ्य कार्यालय छबड़ा के तत्कालीन स्वास्थ्य पर्यवेक्षक को अदालत ने शनिवार को 5 साल कैद व 35 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है।
अकलेरा स्थित उप स्वास्थ्य केन्द्र लसूडिय़ाशाह में कार्यरत नर्स नजमा बानो ने 24 जुलाई 2002 को एसीबी बारां में शिकायत दी थी। जिसमें कहा था कि वह 1997 से 2000 तक उप स्वास्थ्य केन्द्र छबड़ा में कार्यरत थी।
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उस समय का उसका वेतन फिक्सेशन छबड़ा में बकाया था। उसका यह मामला तत्कालीन स्वास्थ्य पर्यवेक्षक कम लिपिक राजेन्द्र स्वरूप गुप्ता के पास लम्बित है। वह 5 साल से कार्यालय के चक्कर लगा रही है, लेकिन उसका काम नहीं किया जा रहा। उसका यह काम करने की एवज में राजेन्द्र स्वरूप गुप्ता उससे एक हजार रुपए रिश्वत की मांग कर रहा है।
इस शिकायत पर एसीबी ने ट्रेप की कार्रवाई करते हुए 26 जुलाई को गुप्ता को एक हजार रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। अनुसंधान के बाद एसीबी ने आरोपित के खिलाफ 2004 में चालान पेश किया।
सहायक निदेशक अभियोजन एहसान अहमद खान ने बताया कि भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय के न्यायाधीश अश्वनी विज ने राजेन्द्र स्वरूप गुप्ता को रिश्वत मांगने व लेने का दोषी माना। अपराध की गम्भीरता व आरोपित के आचरण को देखते हुए उसे 5 साल कैद की सजा व 35 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया है।