
UP Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां चुनावी मुकाबला हमेशा चर्चा में रहता है। मेरठ कैंट विधानसभा सीट भी ऐसी ही सीटों में शामिल है। पिछले करीब 30 साल से यहां भारतीय जनता पार्टी का दबदबा कायम है। प्रदेश में सरकार भले ही सपा, बसपा या कांग्रेस की रही हो, लेकिन मेरठ कैंट की जनता ने लगातार भाजपा पर भरोसा जताया है।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अब इस सीट पर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा अपने विकास कार्यों के सहारे एक बार फिर जीत का दावा कर रही है, वहीं बसपा इस बार समीकरण बदलने की तैयारी में जुटी है।
मेरठ कैंट विधानसभा सीट पर BJP की पकड़ लंबे समय से मजबूत रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के अमित अग्रवाल ने यहां से जीत दर्ज की थी। इससे पहले 2002 से 2017 तक सत्य प्रकाश अग्रवाल लगातार विधायक रहे। अमित अग्रवाल इससे पहले 1993 और 1996 में भी इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
2022 में दूसरे स्थान पर रही बहुजन समाज पार्टी अब 2027 के चुनाव में बड़ा उलटफेर करने का दावा कर रही है। बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी ने कैंट क्षेत्र में अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए विशेष अभियान चलाया है। पार्टी का दावा है कि स्थानीय लोगों में विधायक और सरकार के कामकाज को लेकर नाराजगी है और इस बार जनता बदलाव के मूड में है।
मेरठ कैंट विधानसभा क्षेत्र में करीब 3.16 लाख मतदाता हैं। यहां वैश्य समाज के करीब 70 हजार, पंजाबी समाज के करीब 50 हजार, दलित समाज के करीब 40 हजार, ब्राह्मण करीब 35 हजार, मुस्लिम करीब 25 हजार, गुर्जर करीब 20 हजार, सैनी करीब 17 हजार और जाट समाज के करीब 15 हजार मतदाता हैं। वहीं, वैश्य और पंजाबी मतदाताओं का झुकाव लंबे समय से BJP की तरफ रहा है। इसके साथ ही ब्राह्मण, गुर्जर और जाट वोट बैंक भी BJP को मजबूती देता रहा है।
मेरठ कैंट भाजपा के लिए मजबूत सीट बनी हुई है। गंगानगर, मोदीपुरम और कंकरखेड़ा जैसे इलाकों में मध्यम वर्ग और कारोबारी आबादी ज्यादा है, जो भाजपा के साथ लंबे समय से जुड़ी रही है। वहीं राष्ट्रीय लोक दल के एनडीए में शामिल होने के बाद जाट बहुल इलाकों में भी BJP की स्थिति मजबूत हुई है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अन्य विधानसभा क्षेत्रों की तुलना में कम है, जिससे विपक्षी दलों को एकतरफा वोट मिलने का फायदा नहीं मिल पाता।