
Jama Masjid Police Notice: मेरठ-बुलंदशहर मार्ग पर स्थित खरखौदा थाने के पास बनी जामा मस्जिद के अवैध निर्माण को लेकर पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। पुलिस का कहना है कि यह मस्जिद अवैध रूप से थाने की सरकारी जमीन पर बनाई गई है। इसी सिलसिले में पुलिस ने शनिवार को मस्जिद के इमाम अब्दुल गफ्फार को दूसरा नोटिस थमा दिया है। इस बार पुलिस ने साफ कहा है कि सिर्फ 5 दिनों के अंदर मस्जिद के असली कागजात जमा करें, नहीं तो कानूनी कार्रवाई होगी।
यह पूरा मामला मस्जिद से जुड़े मालिकाना हक के दस्तावेजों का है। इससे पहले खरखौदा थाना प्रभारी की ओर से 13 जून को इमाम को पहला नोटिस भेजा गया था। उस दौरान पुलिस ने सबूत और कागजात पेश करने के लिए पूरे 7 दिनों का समय दिया था। लेकिन मस्जिद समिति या इमाम की तरफ से कोई भी पुख्ता दस्तावेज जमा नहीं कराया गया। इसलिए अब पुलिस ने अब यह दूसरा नोटिस जारी किया है।
इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राजस्व विभाग की टीम ने एक आवासीय कॉलोनी के निर्माण को लेकर जमीन की नाप-जोख की। एसपी के अनुसार, सरकारी रिकॉर्ड्स खंगालने पर पता चला कि जिस जमीन पर मस्जिद खड़ी है, वह असल में खरखौदा थाने की है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, करीब 6450 वर्ग मीटर जमीन थाने के नाम पर दर्ज है, जिस पर बाद में यह मस्जिद बना ली गई।
जब पुलिस ने इस मामले में इमाम अब्दुल गफ्फार से पूछताछ की और सबूत मांगे, तो इमाम अब्दुल गफ्फार ने कहा कि यह मस्जिद वक्फ बोर्ड की संपत्ति है। लेकिन जब बात जमीनी कागजात या कोई ठोस सबूत दिखाने की आई तो वह पुलिस को इसके पक्ष में कोई ठोस सबूत या पक्के कागजात नहीं दिखा पाए।
इस मामले पर मेरठ के एसएसपी ने साफ कहा है कि कानून के मुताबिक ही काम होगा। अगर अगले 5 दिनों में मस्जिद से जुड़े सही और पक्के कागजात नहीं मिलते हैं, तो सुप्रीम कोर्ट के नियमों को ध्यान में रखते हुए इस अवैध निर्माण पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।