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India-China Dispute: Kapil Sibal बोले- Nehru के समय China ने छोड़ दिया था Galwan Valley पर दावा

India-China Dispute को लेकर Congress leader Kapil Sibal ने Modi Governmentपर साधा निशाना China ने Former PM Nehru समय के दौरान स्वीकार कर लिया था कि Galwan Valley भारत की है  

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India-China Dispute: Kapil Sibal बोले- Nehru के समय China ने छोड़ दिया था Galwan Valley पर दावा

नई दिल्ली। जहां एक ओर भारत और चीन के बीच लगातार तनाव ( India-China Dispute ) बना हुआ है, वहीं भाजपा ( BJP ) और मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ( Congress ) के बीच भी टकराव कम नहीं हुआ है। कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ( Congress leader Kapil Sibal ) ने इतिहास की बातों का जिक्र करते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ( Former PM Jawaharlal Nehru ) चीन द्वारा अपना खुद से एलएसी तय करने के प्रति कठोर थे और दावा किया कि चीन ने उनके समय के दौरान स्वीकार कर लिया था कि गलवान घाटी ( Galwan Valley ) भारत की है।

कांग्रेस ने शनिवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा या एलएसी को चीनी प्रधानमंत्री झोउ एनलाई द्वारा 1956 में गढ़ा गया था और फिर 1959 में और 1962 के युद्ध के दौरान और उसके बाद दोहराया गया। चीन के भारत पर आक्रमण के बाद, झोउ एनलाई ने नेहरू को एक पत्र भेजकर उनसे 1959 के चीन के दावे वाली लाइन (रेखा) को स्वीकार करने के लिए कहा और कहा कि चीन इस रेखा से 20 किलोमीटर तक पीछे हटने को तैयार है।

कांग्रेस ने आगे कहा कि जवाब में, नेहरू द्वारा 4 नंवबर को लिखे पत्र में कहा गया कि चीन का प्रस्ताव हुक्मनामे से कम नहीं है। कांग्रेस ने शनिवार को नेहरू की लिखी बातों का जिक्र किया, जिसमें लिखा है, "भारत से चीन की 1959 की रेखा को स्वीकार करने की मांग कुछ ऐसी है, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा, चाहे परिणाम कुछ भी हो और चाहे कितना ही लंबा और मुश्किल संघर्ष हो। केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कांग्रेस ने कहा कि जिन चीनियों ने 1959 की रेखा में पूरी गलवान घाटी को भारत का हिस्सा दर्शाया था, उन लोगों ने पहली बार औपचारिक रूप से पूरी गलवान घाटी पर अपना दावा किया है।

कांग्रेस ने यह हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लेह दौरे के एक दिन बाद किया है। मोदी ने लेह दौरे के दौरान चीन का नाम लिए बिना चेतावनी देते हुए कहा था कि विस्तारवाद का दौर अब खत्म हो गया है, यह दौर विकास का है और इतिहास गवाह है कि विस्तारवादी ताकतें या तो हार गई हैं या उन्हें पीछे हटना पड़ा है।

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Updated on:
04 Jul 2020 10:50 pm
Published on:
04 Jul 2020 07:14 pm
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