IVF Scam: देश में IVF तकनीक की आड़ में एक खौफनाक फर्टिलिटी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं से बार-बार अवैध तरीके से एग्स निकालकर उनके स्वास्थ्य से गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था।
IVF Illegal Egg Donation: देश में जहां आईवीएफ (IVF) तकनीक ने लाखों परिवारों को उम्मीद दी है, वहीं अब इसी सिस्टम के भीतर एक डरावना सच सामने आया है। जांच में सामने आया कि IVF तकनीक की आड़ में अवैध फर्टिलिटी रैकेट और सरोगेसी का संगठित नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था। इस पूरे खेल में आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाया जा रहा था और पैसों का लालच देकर उनके स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ किया जा रहा था। एक महिला जीवन में सिर्फ एक बार एग डोनेट कर सकती है, लेकिन यहां इन एजेंटों के जरिए महिलाओं से बार-बार एग्स निकाले जा रहे थे। गुरुग्राम में बिना रजिस्ट्रेशन चल रहे एक सेंटर पर छापेमारी में 84 भ्रूण और विदेशी नागरिकों के सीमन सैंपल बरामद हुए हैं। जांच में लिंग और रंग के आधार पर बच्चों की अवैध तस्करी का मामला भी सामने आया है।
महाराष्ट्र पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह सिर्फ एक शहर का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क है जो मुंबई, ठाणे, पुणे, बारामती और नासिक तक फैला हुआ है। जांच में 30 से अधिक डॉक्टरों और कई फर्टिलिटी सेंटरों के नाम सामने आए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाकर उन्हें एजेंटों के जरिए एक शहर से दूसरे शहर भेजा जाता था।
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि कई महिलाओं का बार-बार अलग-अलग IVF सेंटरों में इस्तेमाल किया गया। जबकि नियमों के अनुसार एक महिला केवल एक बार ही एग डोनेट कर सकती है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि 'अब तक हमने चार डॉक्टरों को नोटिस जारी किए हैं। उनके बयानों और जांच के आधार पर, इसमें शामिल अन्य डॉक्टरों को भी नोटिस भेजे जाएंगे।' जांच में यह भी सामने आया कि हार्मोन इंजेक्शन बिना सही मेडिकल निगरानी के दिए जा रहे थे। कई बार ये इंजेक्शन एजेंट के घरों पर ही लगाए जाते थे।
हरियाणा के गुरुग्राम में सुशांत लोक 1 इलाके में एक अवैध IVF और सरोगेसी सेंटर पर छापा पड़ा। अधिकारियों ने बताया कि यह सेंटर बिना किसी रजिस्ट्रेशन के पूरी तरह चल रहा था और हर प्रक्रिया के लिए लाखों रुपये वसूले जा रहे थे। CMO ने कहा कि 'हरियाणा में किसी IVF सेंटर के खिलाफ यह पहली FIR है। हमने डॉक्टरों की छह-सदस्यीय टीम बनाई है। यह टीम गुड़गांव में ऐसे सभी सेंटरों की जांच कर रही है। इस खास मामले में, हमें एक गुमनाम सूत्र से मेल मिला था, जिसमें बताया गया था कि सेंटर में गैर-कानूनी गतिविधियां चल रही हैं।
हमने DG (स्वास्थ्य) और जिला अधिकारियों को इसकी जानकारी दी और छापा मारा। हमें कई तरह की अनियमितताएं मिलीं। पहली बात, सेंटर रजिस्टर्ड नहीं था। दूसरी बात, इस बात के सबूत मिले कि जरूरी मंजूरी के बिना ही IVF, IUI और एग डोनेशन की प्रक्रियाएं चल रही थीं। हमें 84 भ्रूण भी मिले। जांच में 68 सीमन सैंपल भी फ्रीज पाए गए, जिनमें विदेशी नागरिकों से जुड़े रिकॉर्ड भी शामिल हैं।
जांच अब सिर्फ IVF तक सीमित नहीं रही। अहमदाबाद और हैदराबाद से जुड़े एक मामले में नर्स पर आरोप है कि वह बच्चों की तस्करी रैकेट से जुड़ी थी। रिपोर्ट के अनुसार, कम से कम 20 बच्चों को अवैध रूप से एक राज्य से दूसरे राज्य भेजा गया। यहां तक कि बच्चों की कीमत उनके रंग और लिंग के आधार पर तय की जाती थी। जांच में सामने आया है कि कई महिलाएं पहले क्लीनिकल ट्रायल में शामिल होती थीं, फिर धीरे-धीरे उन्हें इस नेटवर्क में धकेल दिया जाता था। कुछ महिलाओं को 15,000 से 20,000 रुपये प्रति ट्रायल दिए जाते थे। बाद में उन्हें सरोगेसी और एग डोनेशन के लिए इस्तेमाल किया जाने लगा।
भारत में IVF और एग डोनेशन को असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एक्ट (Assisted Reproductive Technology (Regulation) Act, 2021 के तहत नियंत्रित किया जाता है।
Act के मुख्य नियम