
TMC split: पश्चिम बंगाल के दमदम संसदीय क्षेत्र से चार बार के सांसद और ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाने वाले सौगत रॉय ने पार्टी में हुई फूट पर इंटरव्यू दिया है। द वॉयर के लिए पत्रकार करण थापर के साथ इंटरव्यू में सौगत ने खुलकर कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी पार्टी को एकजुट नहीं रख पाईं।
सौगत रॉय ने कहा कि यह संकट स्वभाविक नहीं है। यह इसलिए पैदा हुआ, क्योंकि कुछ विधायक व सांसद विधानसभा चुनाव की हार को पचा नहीं पाए। वह ईडी और सीबीआई की कार्रवाई को लेकर सशंकित हैं। उनमें से कुछ पैसों के लालच में भी आ गए हैं। मैं ममता को इसके लिए जिम्मेदार क्यों ठहराऊं?
करण थापर ने जब उनसे पूछा कि क्या इस राजनीतिक संकट के चलते ममता बनर्जी का सियासी करियर खत्म हो जाएगा? तो इस पर सौगत ने कहा कि मैं 1977 से सक्रिय राजनीति में हूं। इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी अपने सबसे बुरे राजनीतिक स्थिति में थी। वह उससे बाहर निकल कर आईं। मैंने खुद ममता को मुश्किल दौर से गुज़रते देखा है जब उन्होंने तृणमूल कांग्रेस बनाई थी। ममता बनर्जी वापसी करेंगी। मैं राजनेताओं के राजनीतिक अंत की भविष्यवाणी करने को तैयार नहीं हूं।
उन्होंने टीएमसी से निलंबित विधायक रितब्रत बनर्जी के साथ ममता के करीबी व कोलकाता के पूर्व मेयर फरहाद हकीम की मीटिंग पर भी नाराजगी जताई। सौगत ने आगे कहा कि मैं आधिकारिक या अनौपचारिक रूप से अभिषेक बनर्जी का बचाव करने वाला नहीं हूं, लेकिन उन लोगों से मैं यह पूछना चाहता हूं कि विधानसभा चुनाव के दौरान और 4 मई को नतीजे आने से पहले तक वे ही नेता अभिषेक बनर्जी की तारीफ क्यों कर रहे थे। बता दें कि उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब लोकसभा में तृणमूल के 28 सदस्यों में से ज़्यादातर ने कथित तौर पर स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर एक अलग गुट के तौर पर मान्यता मांगी और NDA का हिस्सा बनने का फैसला किया।