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TMC के सांसदों-विधायकों के पाला बदलने की पूरी कहानी, ममता ने भाईपो अभिषेक के लिए क्या पार्टी कर दी कुर्बान?

पश्चिम बंगाल में सत्ता हाथ से जाने के बाद अब ममता बनर्जी के सामने दूसरी बड़ी संकट पार्टी बचाने की खड़ी हो गई है। सियासी जानकारों का कहना है कि ममता को भाइपो या पार्टी में से किसी एक को अब चुनना पड़ेगा। पढ़ें पूरी खबर...
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MP Police may arrest Mamata Banerjee nephew Abhishek Banerjee

ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी photo source patrika.com

Trinamool Congress Rebellion:पश्चिम बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद से सियासी भूचाल आया हुआ है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर जमकर अफरातफरी की स्थिति मच गई है। राज्य की सत्ता से बेदखल होने के बाद पार्टी के विधायक व सांसद अब ममता बनर्जी का साथ छोड़ते हुए दिख रहे हैं। सोमवार को जब दिल्ली में टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की बैठक में मौजूद थी, उसी वक्त पार्टी के लगभग दो तिहाई सांसदों ने भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की। वे लोग इसे शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि ये सभी सांसद अब किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं। पार्टी के कई सांसदों के बयान भी इस ओर इशारा कर रहे हैं।

शताब्दी रॉय के घर बागी सांसदों की मीटिंग

दिल्ली में शताब्दी रॉय के घर पर टीएमसी के बागी सांसदों की मीटिंग हुई। इस बैठक में सीएम शुभेन्दु अधिकारी भी मौजूद थे। बागी गुट का नेतृत्व करने वाली काकोली घोष ने यहां तक कह दिया कि वह और उनके साथ मौजूद 20 सांसद प्रदेश के विकास के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करेंगे।

उधर, राज्यसभा और पार्टी से इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने सीधे ममता बनर्जी की पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पार्टी तीन बड़ी बीमारियों से जूझ रही है। भ्रष्टाचार, महिलाओं पर अत्याचार और गलत देखने के बाद भी उसके खिलाफ बोलने की इजाजत नहीं है।

राज्य में विधायक भी रितब्रत के खेमे में जा चुके

तृणमूल कांग्रेस के 80 में से 60 विधायक रितब्रत बंद्दोपाध्याय के खेमे में जा चुके हैं। उन्होंने बीते दिनों कहा था कि TMC के कई सांसद उनसे संपर्क में हैं। यहां तक कि जिस रात दिल्ली में ये बैठक हुई, उस रात भी उन्होंने कुछ सांसदों से बात की जो उस वक्त दिल्ली में थे। यही नहीं, ममता के बेहद करीबी माने जाने वाले फिरहाद हकीम ने भी रितब्रत से सोमवार को मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच 1 घंटे तक मीटिंग चली।

ममता को रिसीव करने नहीं पहुंचे सांसद

ममता बनर्जी जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हुआ करती थीं और दिल्ली दौरे पर आती थीं, उस समय दिल्ली मौजूद सांसद उन्हें रिसीव करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पहुंचते थे। उनके पीछे संसद के गलियारों में और लुटियंस जोन में बड़ा हुजूम चला करता था। लेकिन, इस बार ये नजारा पूरी तरह से गायब था। ममता दिल्ली में INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल हुईं, लेकिन मीडिया से दूरी बनाए रखीं। कोई बड़ा बयान नहीं। कोई फायरब्रांड स्टेटमेंट नहीं।

भाईपो या पार्टी किसे चुनेगी ममता?

कोलकाता के सियासी गलियारों से लेकर दिल्ली के लुटियंस जोन तक इसी बात की चर्चा है कि ममता बनर्जी भाइपो यानि भतीजे अभिषेक बनर्जी या पार्टी में से किसे चुनेंगी। बागी गुट ने साफ तौर पर अभिषेक बनर्जी को अपना नेता मानने से इनकार कर दिया है। उनका साफ कहना है कि वह ममता बनर्जी का नेतृत्व स्वीकार करने को तैयार हैं, लेकिन अभिषेक बनर्जी का नहीं।