भाजपा अब कैराना व नूरपुर को किसी भी हाल में खोना नहीं चाहेगी
नोएडा। गोरखपुर और फूलपुर उपचुनाव में जीत के बाद सपा और बसपा का यह गठबंधन आगे भी जारी रहने के संकेत मिले हैं। अब राजनीतिक दलों की निगाहें कैराना और नूरपुर पर हैं। सांसद हुकुम सिंह और विधायक लोकेंद्र सिंह चौहान की मौत के बाद खाली हुई इन सीटों पर जल्द ही उपचुनाव होने की संभावना है। राजनीतिक पार्टियों ने यहां अपनी गोट बिछानी भी शुरू कर दी हैं। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया ताे शामली में दो दिन तक रुक भी चुके हैं। इतना ही नहीं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी 30 मार्च को बागपत पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि उस दौरान वह वेस्ट यूपी की गणित भी समझेंगे क्योंकि भाजपा अब कैराना व नूरपुर को किसी भी हाल में खोना नहीं चाहेगी। उधर, कैराना उपुचनाव को लेकर बसपा ने भी एक बड़ा फैसला लेकर सबको चौंका दिया है।
जयंत चौधरी भी आजमा सकते हैं किस्मत
वैसे तो रालोद ने भी सपा और बसपा गठबंधन का हिस्सा बनने की आेर संकेत दिए हैं। चर्चा तो यह भी शुरू हो गई है कि रालोद की तरफ से चौधरी अजित सिंह के बेटे जयंत चौधरी कैराना उपचुनाव में किस्मत आजमा सकते हैं। अगर उन्हें सपा और बसपा का साथ मिल जाता है तो उनकी जीत के चांसेज भी बढ़ जाते हैं। इसकी वजह यहां के समीकरण हैं। यहां दलित-मुस्लिम समीकरण किसी को भी जिताने का माद्दा रखता है। कैराना में मुस्लिम वोटरों की संख्या करीब 6 लाख जबकि दलित मतदाताओं की संख्या करीब 2.5 लाख है। यह देखते हुए बसपा भी यहां से दांव खेल सकती है। हालांकि, माना जाता है कि बसपा कभी उपचुनाव नहीं लड़ती लेकिन 2009 के उपचुनाव में बसपा की तरफ से तबस्सुम बेगम ने हुकुम सिंह को मात दी थी।
तबस्सुम बेगम के नाम पर राजी नहीं बसपा आलाकमान
बसपा के एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि तबस्सुम बेगम ने आलाकमान से कैराना के लिए टिकट मांगा था लेकिन उनके नाम पर मंजूरी नहीं मिली। कैराना बसपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि फिलहाल पार्टी की तरफ से कैराना के लिए तीन नाम मांगे गए हैं। उनका यह भी कहना है कि तबस्सुम बेगम को टिकट देने के लिए आलाकमान राजी नहीं है। वहीं, नाम मांगे जाने से अब यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि सपा और बसपा की तरफ से प्रत्याशी खड़ा कर दिया गया तो जयंत चौधरी शायद गठबंधन का हिस्सा न बनें। उधर, सपा के कैराना विधायक नूर हसन ने चुनाव लड़ने की किसी भी संभावना से इंकार कर दिया है। वह सांसद हुकुम सिंह का बहुत आदर करते हैं। इस वजह से वह भाजपा की संभावित उम्मीदवार मृगांका सिंह के सामने चुनाव नहीं लड़ना चाहते।