
Bihar tender Scam: पटना की स्पेशल विजिलेंस कोर्ट ने बिहार टेंडर घोटाले के कथित मास्टरमाइंड और ठेकेदार रिशु श्री को स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की पांच दिन की रिमांड पर भेज दिया है। दूसरी ओर इस मामले में जांच एजेंसी की रडार पर आने के बाद से फरार बिहार के सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस अभी भी लापता हैं। उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम ज़मानत की अर्ज़ी दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट ने उस मामले की सुनवाई भी टाल दी है।
स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) ने टेंडर घोटाले के मुख्य ब्रोकर रिशु श्री से पूछताछ के लिए कोर्ट से सात दिन की रिमांड मांगी थी। मामले के दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निगरानी की विशेष अदालत ने 5 दिनों की रिमांड मंजूर की है। रिशु श्री अभी पटना की बेउर जेल में न्यायिक हिरासत में हैं।
सूत्रों का कहना है कि रिमांड के दौरान SVU की स्पेशल इंटेरोगेशन टीम रिशु श्री के सामने सरकारी फाइलों और बैंक ट्रांजैक्शंस का पूरा पुलिंदा खोलने वाली है। रिशु से 100 से अधिक कड़े सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें सबसे मुख्य होगा कि टेंडर पास कराने के बदले मिलने वाला 8 से 10 फीसदी का 'कमीशन' प्रभावशाली लोगों तक कैसे पहुंचाया जाता था।
नियम के अनुसार लंबी छुट्टी लेकर फरार चल रहे IAS संजीव हंस ने खुद को सुरक्षित करने के लिए विशेष निगरानी अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी। वहीं, जेल में बंद चीफ इंजीनियर तारिणी दास ने भी रेगुलर बेल के लिए अर्जी लगाई थी। अदालत ने मंगलवार को दोनों याचिकाओं पर आंशिक सुनवाई की और SVU से इस पूरे मामले की केस डायरी तलब की है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 24 जून को मुकर्रर की गई है, तब तक संजीव हंस की गिरफ्तारी की तलवार उन पर लटकी रहेगी।
सीनियर IAS अधिकारी संजीव हंस पर भ्रष्टाचार और अपने पद का गलत इस्तेमाल करके बेनामी संपत्ति जमा करने के आरोप हैं। उन पर 2018 में जल संसाधन विभाग के सचिव रहते हुए सुपौल के बिरपुर में 125 करोड़ की लागत से फिजिकल मॉडलिंग सेंटर बनाने के लिए निकाले गए टेंडर में गड़बड़ी करने का आरोप है। आरोप है कि उन्होंने रिशु श्री के साथ मिलकर टेंडर में ऐसी शर्तें शामिल करवाईं जिनसे एक खास प्राइवेट कंपनी को फायदा हो। इसके बदले में, रिशु श्री की एक शेल कंपनी के ज़रिए संजीव हंस को कथित तौर पर 67 लाख का कमीशन सीधे ट्रांसफर किया गया।
इसके अलावा, संजीव हंस पर अपनी पत्नी के नाम पर देश भर में करोड़ों की बेनामी संपत्ति बनाने, पूर्व MLA गुलाब यादव के साथ मिलकर पुणे में CNG पंप चलाने और खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के निजी सचिव (PS) के तौर पर काम करते हुए एक रियल एस्टेट डेवलपमेंट कंपनी से लगभग 1 करोड़ की रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं।
IAS संजीव हंस ने स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) को एक डिटेल्ड लेटर भेजा, जिसमें उन्होंने जांच एजेंसी के आरोपों को खारिज करते हुए खुद को पूरी तरह बेगुनाह बताया है। हंस ने कहा कि 3.5 करोड़ से ज़्यादा के टेंडर से जुड़े फैसले अकेले सचिव नहीं, बल्कि डिपार्टमेंट की टेंडर कमेटी लेती है। इसलिए, किसी सामूहिक फैसले के लिए उन्हें व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराना गलत है।
उन्होंने आगे कहा कि बिरपुर फिजिकल मॉडलिंग सेंटर प्रोजेक्ट को वर्ल्ड बैंक से फंड मिला था और प्रोजेक्ट के हर टेक्निकल मूल्यांकन और अहम चरण के लिए बैंक से लिखित सहमति और मंज़ूरी ली गई थी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि उनका रिशु श्री या उनकी कंपनियों के साथ कोई बिज़नेस संबंध नहीं था और दावा किया कि FIR में बताए गए 20 लाख के ट्रांज़ैक्शन के समय (फरवरी 2022) वे जल संसाधन विभाग में पोस्टेड भी नहीं थे।