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‘डिप्टी सीएम की वजह से नहीं बदला कोई रूट’, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे विवाद पर NHAI का खुलासा

NHAI on Patna Purnea Expressway: NHAI ने उन आरोपों पर स्थिति स्पष्ट की है जिनमें कहा गया था कि बिहार के डिप्टी CM विजय चौधरी के एक सहयोगी की ज़मीन बचाने के लिए पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया था। NHAI ने बताया कि समस्तीपुर के सराय रंजन इलाके में रूट में कोई बदलाव नहीं किया गया है और काम 15 जनवरी 2025 को मंज़ूर किए गए अलाइनमेंट के अनुसार ही चल रहा है।
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पटना

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Anand Shekhar

Jun 16, 2026

Delhi NH-148AE Tunnel Project

द्वारका एक्सप्रेसवे से वसंत कुंज को जोड़ेगा नया 6-लेन NH-148AE कॉरिडोर (Photo: IANS/File)

Patna Purnea Expressway: बिहार के सबसे महत्वाकांक्षी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे को लेकर चल रहा विवाद अब पूरी तरह खत्म हो गया है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (NHAI) ने उन आरोपों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है जिनमें कहा गया था कि समस्तीपुर के सराय रंजन में बिहार के डिप्टी CM विजय कुमार चौधरी के एक सहयोगी की 10.5 बीघा की कीमती जमीन को बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का मूल रूट (अलाइनमेंट) बदला गया था।

NHAI ने इस मामले पर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। प्राधिकरण ने दस्तावेजों और तारीखों के साथ स्पष्ट किया है कि मीडिया के कुछ हिस्सों में चल रही खबरें और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत, बेबुनियाद और भ्रामक हैं।

डिप्टी सीएम पर लगे थे गंभीर आरोप

इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब समस्तीपुर जिले के सरायरंजन प्रखंड के कुछ लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को एक विरोध पत्र भेजा। इस पत्र में सीधा आरोप लगाया गया था कि बिहार के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी के एक बेहद रसूखदार करीबी व्यक्ति की जमीन को एक्सप्रेसवे की जद में आने से बचाने के लिए प्रशासन ने मूल अलाइनमेंट के करीब 5 किलोमीटर हिस्से में मनमाने ढंग से बदलाव कर दिया है।

शिकायतकर्ताओं का दावा था कि इस फेरबदल की वजह से सरायरंजन इलाके के करीब 150 से अधिक गरीब परिवारों के घर, दर्जनों दुकानें और क्षेत्र का 65 वर्ष पुराना ऐतिहासिक केदार संत रामाश्रय (KSR) कॉलेज का एक बड़ा हिस्सा ध्वस्त हो जाएगा, जिससे वहां पढ़ रहे 6,000 छात्रों का भविष्य अंधकार में डूब जाएगा। इस खबर के सामने आते ही बिहार की सियासत गरमा गई थी और विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया था।

NHAI ने दिया जवाब

इन तमाम आरोपों को खारिज करते हुए NHAI ने साफ किया कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का रूट आज का नहीं है। इसे 15 जनवरी 2025 को ही केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली अलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी (AAC) द्वारा अंतिम मंजूरी दी जा चुकी थी। इस उच्च स्तरीय बैठक में बिहार सरकार के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। समस्तीपुर के सरायरंजन (किलोमीटर 48 से किलोमीटर 53) के बीच उसी स्वीकृत रूट पर काम हो रहा है, इसमें कभी कोई बदलाव नहीं किया गया।

KSR कॉलेज की मुख्य बिल्डिंग पूरी तरह सुरक्षित

कॉलेज टूटने की अफवाह पर विराम लगाते हुए NHAI ने कहा कि केदार संत रामाश्रय कॉलेज की मुख्य इमारत को इस एक्सप्रेसवे से कोई खतरा नहीं है। भूमि अधिग्रहण के तहत कॉलेज कैंपस की केवल एक बहुत छोटी और खाली जमीन का हिस्सा प्रभावित हो रहा है। NHAI ने यह भी बताया कि वर्तमान मंजूर रूट की जद में केवल 92 आवासीय और कमर्शियल निर्माण आ रहे हैं। अगर आरोपों के मुताबिक किसी अन्य वैकल्पिक रूट को चुना जाता, तो 255 से अधिक घर और दुकानें इसकी चपेट में आते, जिससे स्थानीय लोगों का विस्थापन तीन गुना अधिक बढ़ जाता।

18000 करोड़ की लागत से हो रहा निर्माण

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगभग 18,000 रुपये करोड़ का खर्च आएगा। यह 244.93 किलोमीटर लंबा 6-लेन (90 मीटर चौड़ा कॉरिडोर) वाला एक शानदार ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा, जो पटना से शुरू होकर वैशाली, समस्तीपुर और मधेपुरा से होते हुए सीधे पूर्णिया तक जाएगा। यात्रा को आसान और निर्बाध बनाने के लिए इस रास्ते पर 21 बड़े पुल, 140 छोटे पुल और 9 रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाए जाएंगे।

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