
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पूर्व उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की ओर से पहले लिए गए फैसले को रिव्यू करने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने बिहार के सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित किए गए सभी 224 कर्मियों के कामों का रिव्यू कर के बहाली की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया है।
सम्राट चौधरी सरकार ने हड़ताल के दौरान पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की ओर से निलंबित किए गए 224 से अधिक कर्मियों का सस्पेंशन का रिव्यू करने को कहा है। दरअसल, 11 फरवरी 2026 से राजस्व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर थे। उस समय विजय कुमार सिन्हा डिप्टी सीएम के साथ-साथ राजस्व मंत्री भी थे। उन्होंने पहले कर्मचारियों को बातचीत के लिए बुलाया, लेकिन जब बात नहीं बनी तो हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए अलग-अलग आदेश जारी कर 224 कर्मियों को निलंबित कर दिया था। विजय सिन्हा ने उस समय तर्क दिया था कि आम लोगों की परेशानी किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसके बाद संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई करते हुए निलंबन किया गया था। अब सम्राट चौधरी सरकार ने इन सभी कर्मियों का निलंबन वापस ले लिया है।
सम्राट सरकार के इस फैसले पर यूजर्स की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मुकेश कुमार नाम के एक यूजर ने लिखा कि सरकार अधिकारियों के जरिए लूट को बढ़ावा दे रही है। वहीं, अमित शर्मा ने टिप्पणी की कि बिहार में जल्द ही बीजेपी बिखर जाएगी। मणिकांत नाम के यूजर ने इस फैसले को गलत बताया और कहा कि अधिकारियों ने इसे लूट का अड्डा बना लिया था। एक अन्य यूजर ने भी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि सरकार अब अपना असली रंग दिखाने लगी है।
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद से बीजेपी के भीतर चल रही खींचतान से इसको जोड़कर इस घटनाक्रम को देखा जा रहा है। सम्राट सरकार के शपथ ग्रहण से पहले पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि उन्होंने ज़मीन पर मेहनत और लंबा संघर्ष किया है, और ‘कमांडर’ (पार्टी नेतृत्व) के फैसले पर ...। उनके इस बयान के बाद से ही पार्टी के भीतर सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा गुट आमने सामने है।