पटना

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, कहा- पहले रजिस्ट्रार के सामने रखें अपनी बात

Supreme court on Bharat Tiwari Encounter: भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में अब कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई है। हालांकि शीर्ष अदालत ने मामले की तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को पहले रजिस्ट्री के समक्ष मामला सूचीबद्ध कराने की प्रक्रिया अपनाने को कहा है।

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Jun 22, 2026
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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार

Bharat Tiwari Encounter: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर में बिलौटी गांव के रहने वाले 28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी की कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस घटना को 'एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग' (न्यायिक प्रक्रिया से बाहर हत्या) बताते हुए और मामले की CBI जांच की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता की तत्काल सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट की वेकेशन बेंच की अध्यक्षता कर रहीं जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने मामले की गंभीरता को तो माना, लेकिन तुरंत इस पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को स्पष्ट निर्देश दिया कि अगर वाकई तुरंत सुनवाई की जरूरत है, तो मामले को पहले तय कानूनी प्रक्रिया के तहत सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के सामने रखना होगा, जिसके बाद नियमों के अनुसार इसे लिस्ट किया जाएगा।

कोर्ट ने त्वरित सुनवाई से किया इनकार

याचिकाकर्ता और सीनियर एडवोकेट विशाल तिवारी ने जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच से मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 'अर्जेंट लिस्टिंग' कैटेगरी में शामिल करने का अनुरोध किया। वकील ने तर्क दिया कि बिहार पुलिस ने सरेंडर करने के बावजूद उस युवक को बहुत करीब से गोली मारी, जो नागरिकों के मौलिक अधिकारों और कानून के शासन का खुला उल्लंघन है। पीठ ने दलीलों को सुनने के बाद स्पष्ट किया कि किसी भी जनहित याचिका पर सीधे वेकेशन बेंच में त्वरित सुनवाई का फैसला नहीं लिया जा सकता।

याचिका में क्या है मुख्य मांगें

सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में शाहपुर के बिलौटी बधार में 17 जून को हुए भरत तिवारी के एनकाउंटर को पूरी तरह फर्जी बताया गया है। याचिका में मुख्य रूप से भोजपुर पुलिस और स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के उन दोषी अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की गई है जो इस संदिग्ध एनकाउंटर में शामिल थे। याचिका में मांग की गई है कि स्थानीय पुलिस विभाग की संलिप्तता को देखते हुए, निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए पूरी जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) या एक स्वतंत्र स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) को सौंपी जाए।

याचिका में एक स्वतंत्र एक्सपर्ट कमेटी बनाने की भी मांग की गई है, जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें और जो इस कथित एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग से जुड़े सभी तकनीकी, कानूनी और डिजिटल सबूतों (जैसे वायरल वीडियो) की जांच की निगरानी करे।

चौतरफा घिरी सम्राट चौधरी सरकार

17 जून को पुलिस की गोली लगने के बाद पटना के PMCH अस्पताल ले जाते समय ज्यादा खून बहने से भरत तिवारी की मौत हो गई थी। इस घटना से शाहाबाद इलाके में लोगों में भारी गुस्सा है। NDA गठबंधन के अंदर से भी तीखी आलोचना हो रही है। वहीं, विपक्षी नेता खासकर तेजस्वी यादव ने इस घटना को साफ तौर पर "पुलिस की वर्दी की आड़ में की गई हत्या" करार दिया है।

प्रशासनिक दबाव और जनता के भारी विरोध को देखते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले की 'न्यायिक जांच' की घोषणा की है, जिसकी अध्यक्षता पटना हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज करेंगे। इसके अलावा घटना स्थल पर मौजूद शाहपुर थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया गया है।

Updated on:
22 Jun 2026 12:22 pm
Published on:
22 Jun 2026 12:21 pm