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Sawan Vrat Food: सावन में बदल जाता है छत्तीसगढ़ का स्वाद! फलाहार से लेकर देसी व्यंजनों तक की खास कहानी

Chhattisgarh Traditional Food: सावन में छत्तीसगढ़ की रसोई का स्वाद पूरी तरह बदल जाता है। व्रत-उपवास के बीच घरों में सात्विक भोजन, फलाहार और पारंपरिक व्यंजन बनते हैं, वहीं बाजारों में भी पूजा सामग्री और व्रत से जुड़ी खाद्य सामग्री की मांग बढ़ जाती है।
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Aug 01, 2026
Sawan Vrat Food
Sawan Vrat Food: सावन में सात्विक भोजन की परंपरा(photo-patrika)

Sawan Vrat Food: सावन का महीना छत्तीसगढ़ में केवल आस्था और भक्ति का ही नहीं, बल्कि पारंपरिक स्वाद और खानपान का भी महीना माना जाता है। भगवान शिव की आराधना के साथ बड़ी संख्या में लोग सोमवार का व्रत रखते हैं। इस दौरान घरों में सात्विक भोजन, फलाहार और पारंपरिक व्यंजन बनाए जाते हैं। वहीं बाजारों में भी साबूदाना, सिंघाड़ा आटा, कुट्टू, मूंगफली, फल और पूजा सामग्री की मांग बढ़ जाती है। सावन आते ही छत्तीसगढ़ की रसोई का स्वाद भी पूरी तरह बदल जाता है।

Sawan 2026: सावन में सात्विक भोजन की परंपरा

सावन के महीने में लोग तामसिक भोजन से परहेज करते हैं और सात्विक भोजन को प्राथमिकता देते हैं। खासकर सोमवार के व्रत में फल, दूध, दही, मखाना, मूंगफली, साबूदाना और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन खाए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान सात्विक भोजन करने से मन और शरीर दोनों शुद्ध रहते हैं।

फलाहार की थाली में दिखता है स्वाद का संगम

छत्तीसगढ़ के घरों में व्रत के दौरान साबूदाना खिचड़ी, साबूदाना वड़ा, मखाने की खीर, सिंघाड़े की पूरी, कुट्टू के पकौड़े, मूंगफली की चटनी, दही और मौसमी फलों का विशेष महत्व होता है। कई परिवार सेंधा नमक का उपयोग कर विशेष फलाहारी भोजन तैयार करते हैं।

देसी व्यंजनों की भी बढ़ जाती है मांग

सावन में केवल व्रत रखने वाले ही नहीं, बल्कि सामान्य लोग भी हल्का और पारंपरिक भोजन पसंद करते हैं। छत्तीसगढ़ के कई ग्रामीण इलाकों में चीला, फरा, बोरे बासी, भाजी, अरबी और कद्दू जैसी मौसमी सब्जियां भी खूब बनाई जाती हैं। बारिश के मौसम में गर्मागर्म पकवानों का स्वाद परिवारों को एक साथ जोड़ देता है।

बाजारों में बढ़ जाती है रौनक

सावन शुरू होते ही बाजारों में पूजा सामग्री के साथ-साथ फल, दूध, मखाना, साबूदाना, सिंघाड़ा आटा, कुट्टू आटा और ड्राई फ्रूट्स की बिक्री बढ़ जाती है। मिठाई दुकानों पर भी फलाहारी मिठाइयों और स्पेशल व्रत थालियों की मांग बढ़ने लगती है। कई होटल और रेस्टोरेंट भी सावन स्पेशल मेन्यू तैयार करते हैं।

सेहत और स्वाद का अनोखा मेल

विशेषज्ञों के अनुसार सावन में हल्का और पौष्टिक भोजन पाचन के लिए भी बेहतर माना जाता है। बारिश के मौसम में तली-भुनी चीजों की बजाय फल, दूध, दही और सूखे मेवे शरीर को ऊर्जा देने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाते हैं। यही कारण है कि सावन का भोजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य से भी जुड़ा माना जाता है।

आस्था के साथ स्वाद का उत्सव

छत्तीसगढ़ में सावन केवल मंदिरों, कांवड़ यात्राओं और शिवभक्ति तक सीमित नहीं है। यह महीना घर-घर में बदलते स्वाद, पारंपरिक व्यंजनों और पारिवारिक मेल-मिलाप का भी प्रतीक बन जाता है। व्रत की थाली हो या देसी पकवान, सावन हर घर की रसोई में आस्था और स्वाद का अनूठा संगम लेकर आता है।

Updated on:
01 Aug 2026 01:18 pm
Published on:
01 Aug 2026 01:17 pm