Work Culture Shift: दुनिया भर में कर्मचारी फिर से ऑफिस लौट रहे हैं, क्योंकि ऑफिस में काम करने वाले लोग खुद को ज्यादा जुड़ा, जिम्मेदार और उत्साहित महसूस कर रहे हैं। रिपोर्ट में सामने आया कि हाइब्रिड और वर्क फ्रॉम होम मॉडल की लोकप्रियता घट रही है। आईटी कंपनियां कर्मचारियों को ऑफिस बुला रही हैं और टीम बॉन्डिंग और बेहतर परफॉर्मेंस के लिए ऑफिस कल्चर को ज्यादा असरदार माना जा रहा है।
Work Culture Shift : दुनिया भर में इन दिनों नौकरीपेशा लोगों के बीच एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। घर से काम (Work From Home) करने के कल्चर को कभी लोग सबसे आरामदायक मानते थे, लेकिन अब लोगों को उतना पसंद नहीं आ रहा है। दुनिया के कर्मचारी वापस अपनी ऑफिस की टेबल और कुर्सी (Work from Office) पर लौटने लगे हैं। रिपोर्ट अनुसार दुनिया भर में जो लोग रोजाना ऑफिस जाकर काम कर रहे हैं, वे अपने काम से ज्यादा जुड़े और खुश महसूस कर रहे हैं, घर से काम करने वाले लोगों में पहले जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। आइए इस बदलते वर्क कल्चर को समझते हैं।
कामकाज के बदलते तरीकों को 6 महाद्वीपों के 34 देशों में लगभग 38,000 कामकाजी लोगों पर एक बड़ा सर्वे किया गया। इस सर्वे में सामने आया है कि कंपनियां और कर्मचारी दोनों ही ऑफिस को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। भारत की बात करें, तो यहां की तस्वीर दुनिया से थोड़ी अलग है। भारत में 50% कर्मचारी ऐसे हैं, जो रोजाना ऑफिस जाकर अपनी डेस्क पर काम करते हैं। वहीं अगर पूरी दुनिया का औसत देखें, तो वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 56% है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले दुनिया भर में ऑफिस जाने वालों की संख्या में 2% की बढ़ोतरी हुई है, और साल 2022 के मुकाबले तो यह 8 % तक बढ़ गई है।
Hybrid Model: भारत में 36% लोग हाइब्रिड मॉडल के तहत काम कर रहे हैं। कुछ दिन घर पर रहते हैं और कुछ दिन ऑफिस आते हैं। दुनिया भर में ऐसे लोगों की संख्या 32% है, जिसमें पिछले साल से थोड़ी कमी आई है। भारत में केवल 14% कर्मचारी पूरी तरह से घर से काम कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा सिर्फ 12% रह गया है। स्टेटिस्टा कंज्यूमर इनसाइट्स के एक और सर्वे के अनुसार अमेरिकी वयस्कों में भी 43 % लोग ही कंपनी के ऑफिस को अपना मुख्य वर्कप्लेस मानते हैं, जबकि सिर्फ 19 % लोग पूरी तरह घर से काम कर रहे हैं। बाकी लोग फैक्ट्री, फील्ड वर्क या को-वर्किंग स्पेस का इस्तेमाल करते हैं। इससे साफ है कि दुनिया भर में ऑफिस का दबदबा फिर से बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार भारतीय कर्मचारियों को अपने काम की जगह चुनने में काफी आजादी मिल रही है। पूरी दुनिया में काम की आजादी के मामले में मिस्र 47% के साथ पहले स्थान पर है, जबकि भारत 45% के साथ दूसरे स्थान पर आता है। भारत के 45% कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें यह चुनने की पूरी आजादी है कि वे कहां से काम करना चाहते हैं। सर्वे में पता चला है कि जिन कर्मचारियों को काम करने की जगह चुनने की पूरी आजादी मिलती है, वे अपने काम में बहुत ज्यादा दिल लगाते हैं। उनके काम करने का तरीका और उनकी परफॉर्मेंस उन लोगों से कहीं बेहतर होती है जिन पर जबरदस्ती पाबंदियां लगाई जाती हैं।
घर से काम करना आरामदायक लगता हो, लेकिन काम के प्रति लगाव और जुड़ाव के मामले में ऑफिस जाने वाले बाजी मार रहे हैं। जो लोग रोज ऑफिस जाते हैं, उनका अपने काम से जुड़ाव सबसे ज्यादा 21% देखा गया। वहीं जो लोग कभी घर और कभी ऑफिस से काम करते हैं, वे 19 % के साथ दूसरे नंबर पर रहे। आंकड़ा बताता है कि केवल सिर्फ 8% लोग ही अपने काम से गहराई से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। आर्थिक और सामाजिक नजरिए से देखें तो इस साल भारत के कर्मचारियों में काम के प्रति जुड़ाव में सबसे बड़ी गिरावट देखी गई है और यह 5% गिरकर 19% पर आ गया है। वहीं मध्य पूर्व और अफ्रीका के देशों में यह 3% बढ़कर 25% हो गया है।
काम के प्रति लगन और जिम्मेदारी को लेकर अलग-अलग उम्र और जेंडर के लोगों में अंतर देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार पूरी तरह डूबकर काम करने के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है। जहां 22% महिला कर्मचारी अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित दिखीं, वहीं पुरुषों में यह आंकड़ा सिर्फ 17% ही रहा। उम्र के हिसाब से देखें, तो मेच्योर और अनुभवी कर्मचारी अपने काम को लेकर सबसे ज्यादा गंभीर हैं। 40 से 54 वर्ष के कर्मचारियों में काम के प्रति लगाव 24 % पाया गया, जबकि 18 से 26 वर्ष के युवाओं में यह केवल 15% था। नई पीढ़ी को वर्क कल्चर में ढलने के लिए शायद कुछ अलग तरह के माहौल की जरूरत है।
काम चाहे जहां से भी हो, लेकिन जब तक टीम अच्छी न हो, काम भी अच्छा नहीं होता है। रिपोर्ट के अनुसार 33% भारतीय कर्मचारी यह मानते हैं कि वे दुनिया की सबसे बेहतरीन टीम का हिस्सा हैं। इस मामले में भी भारत, मिस्र के बाद पूरी दुनिया में दूसरे नंबर पर आता है। पिछले साल की तुलना में इस अहसास में 3% की कमी आई है। कंपनियों को अगर कर्मचारियों का भरोसा और जुड़ाव बनाए रखना है, तो उन्हें टीम बॉन्डिंग, कर्मचारियों के पर्सनल डेवलपमेंट और लोकल लीडरशिप ट्रेनिंग पर ज्यादा ध्यान देना होगा। लीडर्स मजबूत नहीं होंगे, तब तक टीम में वो अपनापन पैदा करना मुश्किल होगा जो काम को आगे बढ़ाता है।
भारत की सबसे बड़ी आईटी कंपनियों में शामिल इंफोसिस (Infosys) में दुनिया भर में 3,23,500 से ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें से ज्यादातर भारत में हैं। कंपनी नवंबर 2023 से ही अपने कर्मचारियों को लगातार ऑफिस वापस बुलाने की कोशिश कर रही है। भारत के प्रमुख शहरों में इंफोसिस के कर्मचारियों की उपस्थिति दर को देखें, तो बेंगलुरु 57% के साथ सबसे आगे चल रहा है। इसके बाद चेन्नई में 52% और पुणे में 50% कर्मचारी ऑफिस आ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ नागपुर में 46%, इंदौर में 41% और दिल्ली-एनसीआर के गुरुग्राम में सबसे कम केवल 32% उपस्थिति दर्ज की गई है, जिससे साफ है कि गुरुग्राम में अभी भी लोग ऑफिस आने से कतरा रहे हैं।
ऑफिस आने की यह रफ्तार सिर्फ शहरों पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी निर्भर करती है कि कर्मचारी किस सेक्टर या डिपार्टमेंट में काम कर रहा है। इंजीनियरिंग इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) सेक्टर के लोग सबसे ज्यादा 71% ऑफिस आकर काम कर रहे हैं, क्योंकि इस काम में लैब और टीम के साथ बैठकर कोडिंग-टेस्टिंग करने की जरूरत ज्यादा होती है। इसके बाद इंजीनियरिंग मेडिकल फील्ड में उपस्थिति 55 % और सामान्य IoT में 53% दर्ज की गई है, इंजीनियरिंग ऑटोमोबाइल सेक्टर में यह आंकड़ा सिर्फ 30 % है।
वहीं इंफोसिस के JL6 लेवल के जो सीनियर और अनुभवी प्रोफेशनल्स हैं, उनकी अटेंडेंस सबसे ज्यादा 62 से 73 % के बीच रही। कंपनी के बड़े अधिकारी और इंजीनियरिंग टीमें ऑफिस में बैठकर आपसी तालमेल बढ़ाने के फैसले का सबसे ज्यादा समर्थन कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार घर से काम करने का दौर धीरे-धीरे पुराना हो रहा है। शुरुआत में घर से काम करना सबको अच्छा लगा, लेकिन टीम भावना, काम के प्रति लगन और करियर में तेजी से आगे बढ़ने के लिए आज भी ऑफिस का माहौल ही सबसे बेस्ट माना जा रहा है।