
CG Employment Offices @हिमांशु शर्मा: छत्तीसगढ़ में बेरोजगार युवाओं को नौकरी और स्वरोजगार से जोड़ने वाले रोजगार कार्यालय खुद ही कर्मचारियों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के जिला रोजगार कार्यालयों में 377 स्वीकृत पदों में से 178 पद रिक्त हैं। स्टाफ की कमी का असर रोजगार पंजीयन, प्लेसमेंट, काउंसलिंग, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार मेलों के आयोजन पर पड़ रहा है। कई जिलों में एक ही अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी निभानी पड़ रही है, जिससे बेरोजगार युवाओं को रोजगार सेवाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।
रोजगार विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में कुल 377 स्वीकृत पदों में से केवल 199 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 178 पद खाली हैं। रिक्त पदों का असर प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी सभी स्तरों पर देखा जा रहा है।
राजधानी रायपुर की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां 21 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 9 अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 12 पद रिक्त हैं। इससे रोजगार कार्यालय के नियमित कार्यों पर सीधा असर पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार कई वर्षों से रोजगार कार्यालयों में नई भर्तियां नहीं हुई हैं। सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों के स्थान पर भी नियुक्तियां नहीं की जा रही हैं। परिणामस्वरूप मौजूदा कर्मचारियों पर अतिरिक्त जिम्मेदारियां आ गई हैं और विभाग तय लक्ष्यों को पूरा करने में भी पीछे रह रहा है।
स्टाफ की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रायपुर जिले की उपसंचालक को तीन जिलों का अतिरिक्त प्रभार संभालना पड़ रहा है। रजिस्ट्रेशन, कौशल प्रशिक्षण, प्लेसमेंट ड्राइव, रोजगार मेले और हितग्राहियों के सत्यापन जैसे कार्य समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं।
विभाग हर वर्ष रोजगार मेले और प्लेसमेंट ड्राइव का लक्ष्य तय करता है, लेकिन कर्मचारियों की कमी के कारण कंपनियों से संपर्क, अभ्यर्थियों की काउंसलिंग और आयोजन की तैयारियां प्रभावित हो रही हैं। इससे रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी धीमी पड़ गई है।
रोजगार कार्यालयों में स्टाफ की कमी का सीधा असर युवाओं पर पड़ रहा है। रोजगार पंजीयन, रोजगार कार्ड, करियर मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में देरी हो रही है। युवाओं का कहना है कि जब रोजगार देने वाले विभाग में ही पर्याप्त कर्मचारी नहीं हैं, तो बेरोजगारों को समय पर सेवाएं कैसे मिलेंगी।
बेरोजगार युवाओं और जानकारों का कहना है कि सरकार को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार कार्यालयों के रिक्त पदों पर भर्ती करनी चाहिए। इससे विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी और रोजगार सेवाओं का लाभ युवाओं तक समय पर पहुंच सकेगा।