
ITR Refund 2026: छत्तीसगढ़ के आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने वाले करदाताओं के लिए इस बार रिफंड की प्रक्रिया पहले से अधिक सख्त रहने वाली है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के निर्देश पर आयकर विभाग टैक्स छूट के दावों और रिफंड से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहन जांच करेगा। देशभर में फर्जी टैक्स क्लेम के मामलों के सामने आने के बाद यह फैसला लिया गया है। यदि करदाता की जानकारी, दस्तावेज और रिटर्न पूरी तरह सही पाए जाते हैं तो रिफंड समय पर मिल सकता है, लेकिन किसी भी प्रकार की त्रुटि मिलने पर रिफंड में देरी या अतिरिक्त जांच की संभावना रहेगी।
आयकर विभाग को ऐसे कई मामले मिले हैं, जिनमें संगठित तरीके से फर्जी टैक्स छूट का दावा कर रिफंड हासिल करने की कोशिश की गई। इसे देखते हुए CBDT ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि रिफंड जारी करने से पहले सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों और टैक्स छूट के दावों का सत्यापन किया जाए।
कर सलाहकारों का कहना है कि यदि करदाता ने सही जानकारी के साथ ITR दाखिल किया है, सभी दस्तावेज सही हैं और रिटर्न का ई-वेरिफिकेशन समय पर कर दिया गया है, तो सामान्य स्थिति में लगभग एक महीने के भीतर रिफंड मिल सकता है। सीए एवं कर सलाहकार चेतन तारवानी के अनुसार, रिटर्न प्रोसेसिंग में तेजी लाने के लिए फॉर्म 26AS, ITR और अन्य वित्तीय विवरणों का आपस में मेल खाना बेहद जरूरी है।
फॉर्म 10A से जुड़ी गलतियां
मकान संपत्ति और किराया आय की गलत जानकारी
होम लोन ब्याज पर गलत टैक्स छूट का दावा
बीमा प्रीमियम और पीएफ अंशदान की गलत एंट्री
ITR, Form 26AS, AIS और TIS के आंकड़ों में अंतर
बैंक खाते की अधूरी जानकारी
PAN और Aadhaar लिंक न होना
ITR का ई-वेरिफिकेशन नहीं करना
इन त्रुटियों के कारण रिफंड लंबित हो सकता है या आयकर विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है।
आयकर विभाग ने उन करदाताओं को राहत दी है, जिनके खातों का ऑडिट अनिवार्य नहीं है। ऐसे करदाता अब 31 अगस्त तक अपना आयकर रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। इससे पहले निर्धारित समय सीमा समाप्त होने वाली थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आयकर विभाग की ओर से कोई नोटिस या स्पष्टीकरण मांगा जाता है तो उसे नजरअंदाज न करें। समय पर जवाब देने और आवश्यक त्रुटियों को सुधारने से रिफंड प्रक्रिया प्रभावित नहीं होगी और अनावश्यक परेशानी से बचा जा सकेगा।