उनकी उम्र सपने पालने की है। नन्हीं आखों ने खिलोनों से खेलने का सपना देखा था, लेकिन कहते है बच्चे अपनी भगवान होते है। इन भगवान ने अपने मन में खिलोनों से खेलने के सपनों को एक पल में तोड़ दिया व देश के लिए कोरोना वायरस से लड़ी जा रही जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अपील के बाद जो किया, वो आपको इनके लिए शाबाशी देने को मजबूर कर देगा।
रतलाम. उनकी उम्र सपने पालने की है। नन्हीं आखों ने खिलोनों से खेलने का सपना देखा था, लेकिन कहते है बच्चे अपनी भगवान होते है। इन भगवान ने अपने मन में खिलोनों से खेलने के सपनों को एक पल में तोड़ दिया व देश के लिए कोरोना वायरस से लड़ी जा रही जंग में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की अपील के बाद जो किया, वो आपको इनके लिए शाबाशी देने को मजबूर कर देगा।
भामाशाह बनकर किया दान
जहां पूरे भारत मे कई भामाशाह मुक्तहस्त से दान दे रहे हैं वही ग्राम पलसोड़ा के दो छोटे छोटे बच्चों ने टीवी पर देश और विदेश में कोराना वायरस से आए संकट को देखा उनका मन भावुक हो गया। दोनों बच्चे खिलोना खरीदने के लिए रुपए एकत्रित कर रहे थे, लेकिन लगातार कोरोना वायरस के बढ़ते मरीजों की संख्या को देखने के बाद बच्चों ने अपनी गुल्लक में जो रुपए एकत्रित किए थे, उनका दान कर दिया।
देश को दी प्राथमिकता
गांव के कचरू राठौर ने बताया कि दोनों बच्चों ने पहले आपस में बात की क्यों ना हमने जो खिलोने खरीदने के लिये रुपए एकत्रित किए हैं उन्हें दान कर दे, जिससे देश का भला हो सके । दोनों बच्चों ने टीवी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को सुनने के बाद भावुक मन को लेकर माता पिता से बोले हमे नही लेना खिलौने इसके बजाए कोरोना से लडऩे के लिए रुपए राहत कार्य के लिए देना चाहते है। इसके बाद दोनों बच्चों ने जो रुपए खिलोनों के लिए एकत्रित किए थे, उनका दान कर दिया।
माता पिता की ली मंजूरी
दोनों बच्चे माता पिता की स्वीकृति मिलते ही घर के सामने पंजाब नेशनल बैंक का बीसी सेंटर है जिसे गांव के ही विनोद राठौड़ के द्वारा संचालित किया जाता है, उनके पास गए और कहा कि हमें चाइना के कोई खिलोने नहीं लेना है हमारे गुल्लक में जितने भी पैसे हैं उन्हें राहत कार्य के लिए देना है। इसके बाद सौम्या राठौड़ ने 618 रुपए व जिगर राठौड़ ने 586 रुपए का दान किया।