
Sambhal Mosque News: संभल के कसेरवा गांव में मुस्तफा कादरी मस्जिद पर प्रशासन की बुलडोजर कार्रवाई के बाद सियासत गरमा गई है। मस्जिद ध्वस्त होने के बाद समाजवादी पार्टी के संभल सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि मस्जिद को बचाने के लिए कानूनी स्तर पर प्रयास किए गए थे, लेकिन अधिकारियों ने किसी भी गुहार पर ध्यान नहीं दिया।
मस्जिद गिराए जाने के बाद सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लाख कोशिशों, गुजारिशों और कानूनी दलीलों के बावजूद संभल प्रशासन ने कसेरवा गांव में मस्जिद को शहीद कर दिया। ऐसा लगता है जैसे अधिकारियों ने अपनी आंखों पर पट्टी बांध रखी है और वे एक तय निशाने के तहत काम कर रहे हैं। सांसद ने आगे कहा कि जब देश में जनता की फरियाद और कानूनी दलीलें ही नहीं सुनी जाएंगी तो न्याय व्यवस्था पर से लोगों का भरोसा उठने लगेगा। उन्होंने याद दिलाया कि भारत का संविधान सर्वोपरि है और यह देश किसी एक व्यक्ति, दल या सत्ता की जागीर नहीं है।
सांसद बर्क ने गांव के मौजूदा हालात के बारे में बताते हुए कहा कि इस घटना के बाद से पूरे कसेरुआ गांव में गम और मातम का माहौल है। उन्होंने कहा कि मस्जिद टूटने के बाद हर दिल रो रहा है। गांव की मां-बहनों की आंखें अश्कबार (नम) हैं और छोटे-छोटे बच्चे इस मंजर को देखकर सहमे हुए हैं। बर्क ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि अगर किसी को लगता है कि ताकत के दम पर लोगों की आवाज को दबा दिया जाएगा तो यह उनकी बड़ी भूल है। नाइंसाफी के खिलाफ आवाज हमेशा बुलंद होती रहेगी।
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर जिला प्रशासन का अपना पक्ष है। अधिकारियों का दावा है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी है। राजस्व रिकॉर्ड (सरकारी कागजात) के मुताबिक, जिस जमीन पर मुस्तफा कादरी मस्जिद बनी थी, वह असल में कब्रिस्तान के लिए सुरक्षित रखी गई सरकारी जमीन थी। प्रशासन का कहना है कि यह कदम कोर्ट के आदेश के बाद ही उठाया गया है और इसमें किसी तरह की जल्दबाजी या मनमानी नहीं की गई है।
इस बुलडोजर एक्शन के बाद संभल का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने एलान किया है कि वे इस पूरे मामले पर अपनी बात मजबूती से रखने और प्रशासन की मनमानी को उजागर करने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करेंगे।