
Sukma Conversion Controversy: छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का पोलमपल्ली गांव एक बार फिर धर्मांतरण से जुड़े विवाद को लेकर सुर्खियों में है। इस बार मामला केवल धार्मिक मतभेद तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी परंपराओं, सामाजिक रीति-रिवाजों और ग्राम व्यवस्था से भी जुड़ गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव की पारंपरिक पूजा और धार्मिक अनुष्ठान पूरे होने से पहले ही कुछ परिवारों ने खेतों में जुताई और धान की बुआई शुरू कर दी, जिससे गांव में विवाद की स्थिति बन गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में वर्षों से खेती शुरू करने से पहले सामूहिक पूजा की परंपरा निभाई जाती है। उनका आरोप है कि कुछ परिवारों ने इस परंपरा का पालन नहीं किया, जिससे सामाजिक असहमति बढ़ गई। इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने विरोध जताया और संबंधित परिवारों से जवाब मांगा।
विवाद बढ़ने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने तीन परिवारों के घरों की छतें हटाकर उनसे गांव छोड़ने की मांग की। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने दोनों पक्षों से अलग-अलग और संयुक्त रूप से बातचीत की। कई दौर की चर्चा के बावजूद किसी ठोस सहमति पर बात नहीं बन सकी। इसके बाद प्रशासन ने गांव में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया है।
ग्रामीणों ने धर्मांतरण और गांव की परंपराओं से जुड़े विवाद के समाधान के लिए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में विशेष ग्रामसभा बुलाकर पूरे मामले पर चर्चा करने और सामूहिक निर्णय लेने की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव से जुड़े ऐसे संवेदनशील मामलों का समाधान ग्रामसभा के माध्यम से ही होना चाहिए।
फिलहाल पोलमपल्ली गांव में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानून के दायरे में रहकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी तथा किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।