
निवाई। शहर के व्यस्ततम टोंक रोड पर रविवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब पशु चिकित्सालय के पास स्थित पीपल के पेड़ पर लगा मधुमक्खियों का छत्ता अचानक टूट गया और मधुमक्खियों ने राहगीरों पर हमला कर दिया। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र चीख-पुकार से गूंज उठा और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार छत्ते में अचानक हलचल होने के बाद बड़ी संख्या में मधुमक्खियां झुंड बनाकर बाहर निकलीं और आसपास मौजूद लोगों पर टूट पड़ीं।
कुछ ही क्षणों में हालात बेकाबू हो गए और सड़क पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। दुपहिया वाहन चालक संतुलन खो बैठे, जबकि पैदल राहगीर बचने के लिए दुकानों, घरों और वाहनों के पीछे शरण लेते नजर आए। कई लोगों ने सिर और चेहरे को कपड़ों से ढंककर खुद को बचाने का प्रयास किया। मधुमक्खियों के इस हमले में 50 से अधिक लोग जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों ने हिम्मत दिखाते हुए कई घायलों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया और उन्हें तत्काल अस्पताल भिजवाने की व्यवस्था की।
घटना के दौरान कुछ देर के लिए टोंक रोड पर दुपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों में भय का माहौल बन गया। अचानक हुए हमले से लोग घबरा गए और जान बचाने के लिए भागते नजर आए। घटना की सूचना मिलते ही घायलों को तुरंत राजकीय उप जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दो दर्जन से अधिक लोगों का उपचार किया गया।
अस्पताल में विष्णु सैनी, मिस्वा, सुरेंद्र गुर्जर, राजकरण गुर्जर, सत्यप्रकाश दीक्षित, रवि वर्मा, मानव वैष्णव, मुबारक अहमद, अफान, फारूक, अफसाना, पवन, आशाराम, आमीन, कजोड़मल, अभिषेक, गायत्री, अन्नू, शानू चौहान, मंजू, पदमचंद जैन, शलीन अहमद, बसराम और दीपक सहित 24 घायलों का मधुमक्खियों के डंक से उपचार किया गया। राजकरण गुर्जर की हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे बेहतर उपचार के लिए टोंक रेफर कर दिया।
चिकित्सकों ने बताया कि अधिकांश घायलों की स्थिति सामान्य है और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। घटना के बाद क्षेत्र में कुछ समय तक दहशत का माहौल बना रहा। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे स्थानों पर लगे मधुमक्खियों के छत्तों को समय रहते हटाया जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।