(अमृतसर): भारत-पाक सीमा पर रोजाना शाम को रिट्रीट सैरेमनी में सामान्य की भांति सोमवार को भी हजारों लोग मौजूद थे, लेकिन छत्तीस साल बाद पाकिस्तान की कोट लखपत जेल से रिहा होकर भारत लौटे जयपुर निवासी गजानंद को इन हजारों लोगों में उन्हे अपने एक की तलाश थी जिसे वह पहली नजर में पहचान सके। क्योंकि पिछले छत्तीस वर्षों के दौरान पूरी की पूरी नस्ल ही बदल गई और पीढिय़ां जवान हो गई। करीब साढे तीन दशक बाद सोमवार को अपने देश में आकर भी वे खुद को बेगाना समझते रहे। गजानंद शर्मा पथराई आंखों व रूंधे हुए गले से भीड़ में किसी अपने को तलाश रहे थे। भले ही गजानंद पड़ोसी मुल्क में छत्तीस साल की सजा काटकर आए हैं लेकिन अब अपनों से मिलने के इंतजार में गजानंद की सहनशक्ति जवाब दे रही थी। जैसे ही उसने भारत में प्रवेश किया तो भारी शोरगुल के साथ उसका स्वागत किया गया लेकिन गजानंद ने डरे, सहमे हालात में भारतीय चैक पोस्ट में प्रवेश किया।